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जी-8 भारत की मदद को तैयार

देश में परमाणु करार के मसले पर बेशक राजनीतिक घमासान मचा हो, लेकिन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह दुनिया के सबसे ताकतवर आर्थिक ताकतों के समूह जी-8 से परमाणु बिजली के मामले में भारत से सहयोग करने के लिए राजी करने में कामयाब हुए हैं। जी-8 देशों ने फैसला किया है कि भारत के साथ परमाणु बिजली के मसले सहयोग प्रगाढ़ करने के मामले में अधिक दमदार रुख अपनाया जाएगा। जी-8 देशों में अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, रूस शामिल हैं। ये न्यूक्िलयर सप्लायर ग्रुप में भी हैं। इसलिए भारत जब यहां अंतरराष्ट्रीय नियमों में छूट की मांग करगा तो ये सभी देश भारत का समर्थन करंगे।ड्ढr ड्ढr मनमोहन सिंह की राष्ट्रपति जार्ज बुश से भी एटमी करार के मसले पर बुधवार को लंबी वार्ता हुई। वार्ता के बाद दोनों नेताओं ने भारत-अमरिका असैनिक परमाणु समझौत को दोनों दशों क लिए समान रूप स ‘महत्वपूर्ण’ बताया। बैठक के बाद जार्ज बुश ने मनमोहन सिंह की तारीफ करते हुए कहा कि वह भारत और उसके प्रधानमंत्री की बहुत इज्जत करते हैं। उन्होंने 50 मिनट चली इस बैठक को दो दोस्तों के बीच हुई बहुत अच्छी मुलाकात बताया। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि वह चाहते हैं कि भारत-अमेरिका एक साथ विश्व समस्याओं के समाधान लिए काम करं। पीएम न कहा कि दोनों दशों क बीच रिश्त इतन मधुर कभी नहीं रह। लेकिन सम्मेलन में मामला विकासशील देशों के ऊपर कार्बन कटौती की जिम्मेदारी थोपने का आया, तो मनमोहन सिंह ने बुश के प्रस्ताव का कड़ा विरोध किया।

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