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विधायक रमेश सिंह मुंडा की हत्या

नक्सलियों ने बुधवार को दिनदहाड़े जदयू विधायक दल के नेता रमेश सिंह मुंडा को गोलियों से भून डाला। हमले में विधायक के दो अंगरक्षक और एक युवक की भी मौत हो गयी। घटना राजधानी से 50 किमी दूर बुंडू में घटी। हत्या के विरोध में एनडीए ने गुरुवार को झारखंड बंद का आह्वान किया है। मुख्यमंत्री ने मामले की सीबीआइ जांच कराने की घोषणा की है। इधर, पुलिस प्रवक्ता आरके मल्लिक का कहना है कि वारदात में नक्सलियों का हाथ नहीं है। सरकार ने रांची ग्रामीण एसपी और बुंडू तथा तमाड़ के थानेदार को हटा दिया है। मुंडा एसएस हाइस्कूल में आयोजित प्रतिभा सम्मान समारोह में बतौर मुख्य अतिथि आमंत्रित थे। वे दोपहर 12.15 स्कूल पहुंचे। 1.40 बजे बच्चों और शिक्षकों को पुरस्कार बांटने के बाद वे उन्हें संबोधित कर रहे थे। तभी घुस आये नक्सलियों ने सभागार के बाहर खड़े उनके दो अंगरक्षकों- शिवनाथ मिंज और खुर्शीद आलम को छलनी कर डाला। तीसरा अंगरक्षक शेषनाथ मिंज किसी तरह बच गया। इसके बाद नक्सली भीतर घुसे और विधायक पर अंधाधुंध फायरिंग की। पहली गोली उनके सिर पर लगी। मुंडा वहीं पर गिर पड़े। विधायक खुद को बचाने की कोशिश कर रहे थे, तभी एक हमलावर उनके नजदीक पहुंचा और दो और गोलियां उनके शरीर में उतार दीं। नक्सलियों ने 30-40 गोलियां दागीं। बच्चे और शिक्षक इधर-उधर भागने लगे। अंधाधुंध फायरिंग में एक 18 वर्षीय स्थानीय युवक भी मारा गया। पुलिस ने विधायक को रिम्स भेजा, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने घटनास्थल से 315 बोर और इंसास राइफलों के खोखे किये है। पुलिस इलाके को सील कर कांबिंग ऑपरशन चला रही है। आइजी एके सिन्हा, डीआइजी एनपी सिंह, एसएसपी एमएस भाटिया, ग्रामीण एसपी मो नेहाल, सिटी एसपी रिचर्ड लकड़ा, डीसी अविनाश कुमार समेत कई आला अफसर घटनास्थल पर पहुंचे। बुंडू डीएसपी अजीत डुंगडुंग और एसजीएम चितरांन कुमार घटनास्थल पर जवानों के साथ कैंप कर रहे हैं। विधानसभा में नेता विपक्ष अजरुन मुंडा, विधायक सीपी सिंह, मंत्री एनोस एक्का, पूर्व स्पीकर इंदर सिंह नामधारी भी मौके पर पहुंचे। कांची नदी तट पर अंत्येष्टि आजड्ढr विधायक रमेश सिंह मुंडा की अंत्येष्टि गुरुवार को कांची नदी तट पर होगी। सुबह साढ़े आठ बजे मुंडा का पार्थिव शरीर जदयू प्रदेश कार्यालय से विधानसभा परिसर पहुंचेगा। वहां उन्हें श्रद्धांजलि देने के बाद शव बुंडू स्थित उनके घर ले जाया जायेगा। फिर घर से शव यात्रा कांची नदी तट तक जायेगी। विधायक के एक पुत्र दिल्ली से और दो पुत्र भुवनेश्वर से गुरुवार को रांची पहुंचेंगे। इस कांड की जितनी भी निंदा की जाये, कम है। जनतंत्र में हिंसा का कोई स्थान नहीं है। एसी घटनाएं रोकने के लिए राज्य सरकार कड़े कदम उठाये।जब राज्य में नेता ही सुरक्षित नहीं हैं तो आम जनता कैसे सुरक्षित रहेगी, यह सवाल सबके जेहन में है। रमेश सिंह मुंडा मेर बहुत प्रिय थे। झारखंड सरकार सुरक्षा में हुई इस चूक की जांच कराये। मुंडा की हत्या से पूरा जदयू मर्माहत है, वे पार्टी के निष्ठावान और समर्पित नेता थे। यह क्षति अपूरणीय है। रमेश सिंह मुंडा जसे नेता की हत्या गंभीर चिंता का विषय है। राजनीतिक दल आत्ममंथन करं। एसी घटनाएं राज्य सरकार के लिए चुनौती बनती जा रही हैं। इस सरकार के ऊपर जनता का भरोसा खत्म हो चुका है। कांग्रेस के समर्थन से उग्रवाद तेजी से फैल रहा है। इस सरकार को अब कितने दिन रहना चाहिए।ड्ढr मर्माहत हूं, सीबीआइ जांच होगी : कोड़ाड्ढr रांची। जदयू विधायक दल के नेता रमेश सिंह मुंडा की हत्या पर सीएम मधु कोड़ा ने गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने कहा है कि मैं मर्माहत हूं। सरकार ने घटना की सीबीआइ जांच की अनुशंसा की है। ग्रामीण एसपी और बुंडू के थाना प्रभारी के मुख्यालय बुला लिया गया है। डीाीपी घटनास्थल पर गये है और विशेष छापामारी अभियान चलाने के लिए एक कंपनी फोर्स भेजा जा रहा है। सीएम ने प्रश्नों की बौछार का जवाब देते हुए विधायक की हत्या को प्रशासन का फेल्योर स्वीकारने से इनकार किया। उन्होंने कहा कि पिछले दिनों अड़की में एक कार्यक्रम के दौरान उन्हें पूरी सुरक्षा मुहैया करायी गयी। उनका कार्यक्रम कराया गया। इसे खुफिया तंत्र की फेल्योर भी नहीं कहा जायेगा। पुलिस और खुफिया तंत्र के बीच पूरा समन्वय है और इसका लाभ भी मिला है।ड्ढr कई हार्डकोर उग्रवादी पकड़े गये हैं। पांच करोड़ की लूट की घटना के दिन से ही बुंडू और तमाड़ इलाके में सघन छापामारी अभियान चलाया जा रहा है। छात्रों को रमेश सिंह मुंडा का अंतिम सबक खूब पढ़ना, बढ़ा आदमी बनना . .हम जसे पढ़े-लिखे, वैसे ही तुमलोग भी पढ़ना-लिखना। खूब मन लगा कर पढ़ना, तभी बड़ा आदमी बनोगे। ये अंतिम वाक्य थे विधायक रमेश सिंह मुंडा के। वे एसएस हाई स्कूल बुंडू में आयोजित प्रतिभा सम्मान समारोह में हिस्सा लेने बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे थे। समारोह में आकर विधायक वे काफी उत्साहित थे।ड्ढr मंच पर बैठे-बैठे उन्होंने शिक्षकों के साथ हंसी-ठिठोली भी की। जब उद्घोषक ने संबोधन के लिए उनका नाम पुकारा, तो स्कूल के प्राचार्य ने कहा : माइक इधर ही मंगवा देते हैं। इस पर विधायक मुंडा ने सहाता से कहा : अर कितना माइक इधर-उधर करियेगा। करर-करर करने लगेगा। बहुत आवाज करता है। हम जाकर वहीं से संबोधित करते हैं। बच्चों और शिक्षकों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा : मैं भी गरीब परिवार और पिछड़े क्षेत्र से आता हूं। पढ़ा - लिखा, तो इतना ऊपर तक पहुंच सका। उन्होंने बच्चों से कहा : पढ़ाई बहुत जरूरी है। पढ़ने-लिखने से ही समाज में सम्मान मिलता है। उन्होंने आगे कहा: 10 से मैं राजनीति कर रहा हूं। शुरू में असफलता मिली, एक नहीं, दो नहीं, तीन दफा चुनाव हार गया, लेकिन हिम्मत नहीं हारा। असफलता से मैं तनिक भी विचलित नहीं हुआ। हारा, फिर हारा, लेकिन लक्ष्य से कभी पीछे नहीं हटा और अंतत: जीत गया, दो-दो बार जीता। बाद में विधायक और मंत्री भी बना। असफल होने पर मंथन करना चाहिए, आखिर क्यों सफलता हाथ न लगी। फिर कमियों को दूर कर आगे बढ़ना चाहिए, सफलता तो मिलेगी ही।

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