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रक्षा सौदे के लिए हाथ-पैर मार रही कंपनियां

वायुसेना के लिए 126 विमानों की खरीद की प्रक्रिया आगे बढ़ने के साथ ही विमान निर्माता देशों की ओर से पैरवी का काम तेज होने लगा है। जहां अमेरिका चाहता है कि भारत एफ-16 या एफ-18 विमानों में से किसी एक का चयन करे, वहां जर्मनी यूरोफाइटर, रूस मिग-35, फ्रांस राफैल तथा स्वीडन ग्रिपन लड़ाकू विमानों के पक्षकार है। हाल ही में बर्लिन में हुए एयर शो के दौरान जर्मन सरकार के नेताओं ने रक्षा मंत्री एंटनी से यूरोफाइटर के पक्ष में पैरवी की थी। सूत्रों के मुताबिक वायसेना इस समय निर्माताओं के बिक्री प्रस्तावों में से तकनीकी प्रस्ताव का अध्ययन कर चुकी है। इसके आधार पर निर्माताओं से कुछ स्पष्टीकरण मांगे गए हैं। तकनीकी प्रस्ताव परखे जाने के बाद छह में से कुछ प्रस्ताव अस्वीकृत हो सकते हैं। इसके बाद वित्तीय प्रस्ताव खोले जाएंगे जिनमें विमान की कीमत, प्रशिक्षण, हथियारों की कीमत आदि दर्ज हैं। इस प्रक्रिया के बाद ट्रायल के लिए जिन विमानों को चुना जाएगा, उन्हें इस वर्ष के अंत तक भारत में फील्ड ट्रायल के चरण से गुजरना होगा। इसके लिए एक सीटर और दो सीटर ट्रेनर विमानों को ट्रायल देना पड़ सकता है। इस तरह चयनित निर्माताओं को एक से अधिक विमान लाने पड़ सकते हैं। फील्ड ट्रायल पर एफ-16 विमान की निर्माता कंपनी लॉकहीड मार्टिन के भारत में उपाध्यक्ष ओरविल प्रिन ने ‘हिन्दुस्तान’ को बताया कि वायुसेना ने अपनी जरूरतों को विस्तार और पारदर्शी तरीके से निर्माताओं के सामने रखा है। हम उसी के मुताबिक अपने विमानों का परीक्षण कराएंगे। सरकार की ऑफसेट नीति के बारे में उन्होंने कहा कि नई रक्षा खरीद नीति शीघ्र जारी होने की उम्मीद है। लॉकहीड मार्टिन ने इस बारे में अपनी राय भारत सरकार को दे दी है। यदि नीति में बदलाव नहीं किया जाता तब भी हम विमान बेचने के लिए तैयार हैं लेकिन नीति ऐसी होनी चाहिए जिसका दोनों पक्षों को लाभ हो। स्पेशल आपरेशंस के लिए खरीदे गाए रोड़ डालर मूल्य के छह सी-130 सुपर हक्र्यलिस विमानों के बारे में प्रिन ने बताया कि 2011 तक सभी विमान भारत को दे दिए जाएंगे। अमेरिकी सरकार की फोरेन मिलिट्रीय सेल्स नीति के तहत इन विमानों के इस्तेमाल पर किसी तरह के प्रतिबंध या निरीक्षण की शर्त के बारे में पूछने पर प्रिन ने कहा कि यह दो सरकारों के बीच का मामला है। सभी देश चाहते हैं कि उनकी टेक्नोलोजी किसी तीसरे पक्ष को न दे दी जाए। इस बारे में रूस के सुखोई विमानों का जिक्र करते हुए उन्होने कहा कि रूस भी नहीं चाहता कि भारत उसके विमानों की जानकारी किसी अन्य को न दे। इसके अलावा किसी तरह की शर्त की कोई बात नहीं होनी चाहिए।

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