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करार पर लचीले रुख को भाजपा मजबूर

परमाणु करार पर अंदरखाने बंटी भारतीय जनता पार्टी बिल्ली के गले में घंटी बांधने का साहस नहीं जुटा पा रही है। इसीलिये अभी तक इस मसले पर उसका रुख लचीला ही दिख रहा है। संघ परिवार में भी अमेरिकी समर्थक एक गुट करार के पक्ष में जुट गया है।ड्ढr इस गुट पर अमेरिका में रह रहे हिन्दू स्वयंसेवक संघ से जुड़े प्रो. वेद नंदा का दबाव बताया जा रहा है। संघ के कुछ वरिष्ठ लोगों के प्रमुख अमेरिकियों के साथ संबंधों का खुलासा पहले ही हो चुका है। स्वदेशी जागरण मंच इस मेल मिलाप का सेतू रहा है। संघ के सामने आने के बाद से भाजपा में करार समर्थकों के हौसले बुलंद हुये हैं। सूत्र बता रहे हैं कि विश्वास मत के दौरान पार्टी के कई सांसद अनुपस्थित रह सकते हैं। पार्टी पर कारपोरेट जगत का भी भारी दबाव है, जो करार के पक्ष में हैं। वैसे भी भाजपा अमेरिका विरोधी मुखौटा पहनने के लिये तैयार नहीं है। पार्टी करार के पक्ष में है, लेकिन मौजूदा स्वररूप में नहीं। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की बैठक के बाद आडवाणाी ने अपने राजनीतिक हमले में कहा कि प्रधानमंत्री पर विश्वास नहीं किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि सरकार ने इस समझौते से जुडी आशंकाओं के बारे में संसद और देश की जनता को गुमराह किया है और उसें अब सत्ता में बने रहने का कोई अधिकार नहीं है। इसे देखते हुए सरकार को संसद में जल्द विश्वास मत हासिल करना चाहिए या उसे इस्तीफा दे देना चाहिए। आडवाणी ने कहा कि राजग की ओर से जो लोग परमाणु समझौते पर लगातार नजर रखे हुए और उन्होंने आज सार्वजनिक किए गए दस्तावेज को देखा है। इससे साफ हो गया है कि सरकार जो समझौता करने जा रही है उसके प्रावधान गैर परमाणु हथियार सम्पन्न देश के लिए है जबकि भारत परमाणु हथियार सम्पन्न वाला देश है। उन्होंने कहा कि सरकार ने संसद में इस करार के बारे में उठाए गए प्रश्नों पर जो आश्वासन दिए है वे पूरे नही हुए हैं।

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