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करोड़ों खर्च पर ठीक नहीं हुए पीयू के भवन

रोड़ों रुपये खर्च करने के बाद भी पटना विवि के भवनों को ठीक नहीं कराया जा सका है। हॉस्टलों की छतें चूने लगी हैं और विभागों की दीवारों का रंग उतरने लगा है। इस स्थिति में अब विश्वविद्यालय के अधिकारियों ने खर्च हुई राशि से हुए कार्य की गुणवत्ता पर सवाल खड़े करने शुरू कर दिए हैं। वर्ष 2007 में लगभग चार करोड़ रुपये की राशि भवनों की मरम्मति खर्च किए गए थे। इस राशि का उपयोग विवि मुख्यालय से लेकर हॉस्टलों तक को बेहतर करने के लिए किया गया था।ड्ढr ड्ढr मुख्यालय में मरम्मति का कार्य तो कर्मचारियों की हड़ताल तक चल रहा था लेकिन हॉस्टलों में काम को पूरा कर लिया गया था। अब हॉस्टलों के निरीक्षकों ने विवि प्रशासन को यहां की स्थिति से अवगत कराया है। विवि प्रशासन को हॉस्टलों के चूने की सूचना मिली है। इसके बाद जांच के क्रम में इसे सही पाया गया। एक तरफ विवि प्रशासन द्वारा विश्वविद्यालय के जर्जर भवनों की मरम्मति या उनके जीर्णोद्धार की योजना बनायी जा रही है। वहीं दूसरी तरफ पुरानी मरम्मत के एक साल में ही खराब हो जाने के बाद अब उसको भी ठीक कराने की योजना बनानी होगी। अब शिक्षकों ने मांग शुरू कर दी है कि आखिर मरम्मत के एक साल में ही निर्माण कैसे खराब हो गया। इससे साफ लगता है कि कार्य की गुणवत्ता के साथ छेड़छाड़ की गयी। इस स्थिति में कार्यो की जांच कर दोषी पदाधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की जाने लगी है।ं

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