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जिम्बाब्वे पर प्रतिबंध के खिलाफ रूस और चीन का वीटो

राष्ट्रपति चुनाव के दौरान हुई हिंसक घटनाआें के लिए जिम्बाब्वे के खिलाफ प्रतिबंध लगाने संबंधी पश्चिमी देशों द्वारा समर्थित संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव पर रूस और चीन ने वीटो लगा दिया है। इस प्रस्ताव के तहत जिम्बाब्वे में हथियारों पर रोक और राष्ट्रपति रॉबर्ट मुगाबे और 13 अन्य अधिकारियों पर आर्थिक एवं यात्रा संबंधी प्रतिबंध लगाने के साथ इस देश के लिए संयुक्त राष्ट्र का विशेष दूत नियुक्त किए जाने का प्रावधान है। अमेरिका द्वारा तैयार मसौदे पर शुक्रवार को 15 सदस्ईय सुरक्षा परिषद ने वोट किया जिसमें वीटो पावर चीन और रूस ने इसका विरोध किया जबकि एक सदस्य मतदान के दौरान अनुपस्थित रहा। शुक्रवार के इस घटनाक्रम के बाद जिम्बाब्वे में मौजूद संकट के मद्देनजर रूस और चीन को कम से कम मतदान नहीं करने देने की पश्चिमी देशों की कोशिश पर पानी फिर गया। इससे बड़ी शक्ितयों के बीच तीखी बयानबाजी भी शुरू हो गई है। अमेरिकी राजदूत जाल्मे खलीलजाद ने रूस पर इस सप्ताह जापान में हुए जी-8 शिखर सम्मेलन के दौरान किए गए अपने वादे से पलटने का आरोप लगाया जब मास्को ने मुगाबे सरकार के खिलाफ प्रतिबंधों का समर्थन करते हुए एक बयान जारी किया था। खलीलजाद ने परिषद से कहा कि जिम्बाब्वे मामले पर रूस के रुख से इसके जी-8 के सहयोगी होने के बारे में संदेह होता है। इस प्रस्ताव का विरोध करने वाले अन्य देशों में शामिल दक्षिण अफ्रीका, लीबिया और वियतनाम ने कहा है कि जिम्बाब्वे अंतरराष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा के लिए खतरा नहीं रहा है। उन्होंने चुनाव पर प्रतिबंध लगाने को जिम्बाब्वे के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप बताते हुए देश की सत्तारुढ़ और विपक्षी पार्टियों के बीच दक्षिण अफ्रीका में चल रही मौजूदा बातचीत को एक मौका देना चाहिए। वहीं ब्रिटिश राजदूत जॉन सावर्स ने परिषद से कहा कि वह इस मामले में ऐसे राष्ट्रीय संकट से निपटने और समूचे दक्षिण अफ्रीका में इसे फैलने से रोकने की अपनी जिम्मेदारी निभाने में असफल रहा है। उन्होंने रूस और चीन के निर्णय को जिम्बाब्वे की जनता के दूरगामी हितों के लिए घातक बताते हुए जिम्बाब्वे में हिंसा और प्रताड़ना के दौर की जल्द से जल्द समाप्ति के लिए सुझाव मांगा है। रूस के राजदूत विटाली चुरकिन ने कहा कि यह प्रस्ताव अंतरराष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा की स्थिति कायम करने के परिषद के उपबंधों का खुला उल्लंघन है। उन्होंने कहा कि हमारा मानना है कि ऐसी कार्रवाई अवैध एवं खतरनाक है। वहीं चीन के राजदूत वांग गुयांग ने मतदान से पूर्व संवाददाताआें से कहा कि बीजिंग इस प्रस्ताव की भाषा को स्वीकार नहीं कर सकता और वह जिम्बाब्वे की पार्टियों के बीच वार्ता को इच्छुक है इसलिए ऐसे समय में इस प्रस्ताव को लागू करना ठीक नहीं होगा। जिम्बाब्वे के राजदूत बोनीफे स चियासिकू ने कहा कि सुरक्षा परिषद ने ब्रिटेन और अमेरिका के प्रस्ताव को ठुकरा दिया है जिससे संयुक्त राष्ट्र के चार्टर का उल्लंघन हो रहा था। जिम्बाब्वे की विपक्षी पार्टी मूवमेंट फॉर डेमोक्रेटिक चेंज ने आरोप लगाया है कि मार्च के अंत में हुए राष्ट्रपति चुनाव के पहले चरण से अब तक उसके 113 कार्यकर्ताआें की हत्या कर दी गई है। पार्टी के नेता मोर्गन स्वांगीराई ने मुगाबे समर्थक मिलिशिया द्वारा अपने कार्यकर्ताआें पर हमले किए जाने का आरोप लगाते हुए 27 जून के राष्ट्रपति चुनाव के अंतिम दौर से अपना नाम वापस ले लिया है।

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  • Web Title: जिम्बाब्वे पर प्रतिबंध के खिलाफ वीटो