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प्रेगनेंसी के दौरान डायबिटीचा पर रखें नियंत्रण

इंडोक्राइन सोसाइटी ऑफ इंडिया के वार्षिक कांफ्रेंस में आये तथ्यड्ढr हार्मोन डिस्ऑर्डर से होती है नाटेपन की समस्याड्ढr प्रेगनेंसी के दौरान डायबिटीा पर नियंत्रण बेहद जरूरी है। ऐसा नहीं होने से महिला को गर्भपात और उसके होनेवाले बच्चों की शारीरिक-मानसिक विकृति का खतरा रहता है। उक्त तथ्य शनिवार को इंडोक्राइन सोसाइटी ऑफ इंडिया इस्टर्न जोन की वार्षिक कांफ्रेंस के तकनीकी सत्र में सामने आया। होटल कैपिटोल हिल में आयोजित इस कांफ्रेंस का विधिवत उद्घाटन रांची विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ एए खान ने किया। इस मौके पर उन्होंने समाज में चिकित्सक समुदाय की भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला।ड्ढr दिन भर चले तकनीकी सत्र में डायबिटीा, थायराइड, मोटापा (ओबेसिटी), आयोडीन के कमी से होनेवाले रोग (घेंघा), हार्मोन डिसऑर्डर, डायबिटीा से होनेवाली पैरों की बीमारी, प्रसव के दौरान डायबिटीा की रोकथाम पर चर्चा की गयी। डॉक्टरों ने बताया कि हाइपो थायराइड के कारण महिलाओं में मोटापा और अन्य समस्याएं उत्पन्न होती हैं। शरीर में हार्मोन डिसऑर्डर के कारण भी परशानियां होती हैं। हार्मोन डिसऑर्डर के कारण ही नाटेपन की समस्या उत्पन्न होती है। महिलाओं के चेहर पर अनचाहे बालों को कॉस्मेटिक प्रॉब्लम से जोड़ दिया जाता है। जबकि यह हार्मोन डिसऑर्डर के कारण होता है। वर्कशॉप में डॉ एसके सिंह, डॉ संजीव गुप्ता, मणिपाल हॉस्पीटल के डॉ केो शेट्टी, एसजीपीजीआइ के डॉ गौरव अग्रवाल, डॉ संतोष सिह, डॉ अनिल सिंह, डॉ निलांजन सेनगुप्ता ने व्याख्यान दिया।ड्ढr इस मौके पर डॉ शोभा चक्रवर्ती, डॉ एम आलम, डॉ डीपी आर्या, डॉ उषा रानी, डॉ सुषमा प्रिया, डायबिटोलॉजिस्ट डॉ रांीत कुमार, डॉ एमपी सिंह, डॉ संजय राय, डॉ प्रवीण शंकर, डॉ विजय ढांढनिया, डॉ अजय छावड़ा उपस्थित थे।

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