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ब्रह्मलीन हुए जागेश्वर दास जी

ारिकाधीश राम मंदिर, गाड़ीखाना के मुख्य पुजारी श्रीश्री 108 जागेश्वर दास जी शनिवार को ब्रह्मलीन हो गये। सेवासदन अस्पताल में शाम छह बजे उन्होंने अपना शरीर त्यागा। खबर सुन कर शिष्य और श्रद्धालु शोकाकुल हो गये। बाद में जागेश्वर जी का पार्थिव शरीर मंदिर लाया गया। यहां देर रात तक भक्तों का तांता लगा रहा। शिष्यों ने अपने सदगुरु को अश्रुपूर्ण नेत्रों से श्रद्धांजलि अर्पित की। आचार्य श्यामसुंदर भारद्वाज ने बताया कि रविवार को मंदिर के महंथ रामसुमिरण दास जी आयेंगे। इसके बाद अंतिम यात्रा और अंत्येष्टि कार्यक्रम की रूपरखा तैयार की जायेगी।ड्ढr आचार्य भारद्वाज ने बताया कि जागेश्वर दास जी बालब्रह्मचारी थे। इनके शिष्य देशभर में हैं। उन्होंने अयोध्या, छपरा सहित देश के कई राज्यों में मंदिर और आश्रम का निर्माण कराया है। जागेश्वर दास जी मंदिर में चल रहे अखंड कीर्तन को जारी रखा। अनिश्चित कालीन श्रीरामनाम कीर्तन का संकल्प लेकर उनके गुरु ने तीन नवंबर 1में इसकी शुरुआत की थी। तब से यहां 24 घंटा कीर्तन किया जाता है।ड्ढr उन्होंने बताया कि महंथ बाबा रामदास जी बालकाल की अवस्था में ही जागेश्वर दास जी को छपरा के एक गांव से यहां लाये थे। रामदास जी के ब्रह्मलीन होने के बाद उन्होंने महंथ का पद नहीं लिया। इनके स्थान पर रामसुमिरण दास जी को महंथ बनाया गया। लेकिन जागेश्वर दास जी के सान्निध्य में ही मंदिर का पूजा-पाठ से लेकर संचालन का कार्यभार संपादित किया जाता रहा है।

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