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राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन को लगा ग्रहण

चिकित्सा सुबिधाओं में पिछड़े बिहार को सरकारी मशीनरी पिछड़ा ही बनाए रखना चाहती है। शायद इसीलिए भरपुर राशि रहने के बाद भी गांवों को चिकित्सा उपलब्ध कराने के लिए सही ढंग से काम नहीं हो रहा है। राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन ने राज्य को 4 अरब 8 करोड़ 81 लाख रुपये दिए लेकिन साल भर में खर्च हुआ मात्र 2 अरब 21 करोड़ 64 लाख। अफसरों ने ग्रामीण स्वास्थ्य कार्यक्रम का भठ्ठा बैठा दिया है। इस संबंध में मिशन डायरक्टर, नई दिल्ली ने बिहार के स्वास्थ्य सचिव से जवाब तलब किया है।ड्ढr ड्ढr पहले भागलपुर को ही लें तो स्टेट हेल्थ सोसायटी, पटना से 17 करोड़ 7लाख रुपये मिले लेकिन खर्च हुआ 10 करोड़ 28 लाख। बांका को 10 करोड़ 43 लाख मिला लेकिन 7 करोड़ 44 लाख ही खर्च हो पाए। मुंगेर को 8. रोड़, पूर्णिया को 13. 80 करोड़,कटिहार को 7. 85 करोड़, सहरसा को 8. रोड़, जमुई 7.50 करोड़ रुपये मिले थे लेकिन कहीं भी 50-60 फीसदी से ज्यादा खर्च नहीं हुए। 2007-8 में ग्रामीण हेल्थ मिशन के 1. 87 अरब बिहार में खर्च नहीं हो पाए। इस राशि से कम से कम 40 तरह की स्वास्थ्य योजनाओं पर काम करना था लेकिन कई जिलों में स्कूलों में हेल्थ कैंप लगाने समेत 20 योजनाएं शुरू भी नहीं हुई। एडीशनल पीएचसी में भवन,ओपरशन कक्ष, 24 घंटे चिकित्सा सुबिधा का इंतजमा करना था। भागलपुर जिले के 40 एडीशनल पीएचसी की हालत काफी खराब है।

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