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मैं तमाड़ से लड़ूंगी चुनाव : वसुंधरा मुंड

दिवंगत विधायक रमेश सिंह मुंडा की विधवा वसुंधरा देवी चुनाव लड़ेंगी। वह समाजसेवा करना चाहती हैं। अपने पति के हर सपने को पूरा करना चाहती हैं। बुंडू के अस्पतालडीह स्थित आवास पर हिन्दुस्तान के साथ खास बातचीत में उन्होंने यह बातें कहीं। 50 वर्षीया वसुंधरा देवी अभी भी सामान्य नहीं हो सकी हैं। तीन दिन पहले उनके पति रमेश सिंह मुंडा की हत्या कर दी गयी।ड्ढr इस घटना से वह अंदर से जरूर टूट गयी हैं, लेकिन अपने पति के सपने को साकार करने का जज्बा दिल में लिए कहती हैं कि उन्हें आगे बढ़ने से कोई नहीं डिगा सकता। वे अभी किसी से मिलना भी नहीं चाहतीं। लोग कई तरह की बातें कर रहे हैं।ड्ढr 25 वर्षो तक पति का साथ और इस दौरान झारखंड की जनता से मिले विश्वास ने उन्हें काफी मजबूत कर दिया है। उन्होंने अपने विधायक पति के साथ कई कार्यक्रमों में भी हिस्सा लिया था, जहां उन्हें देखने को मिला कि उनके पति के प्रति लोगों का प्यार कितना ज्यादा है। इस विश्वास को बरकरार रखने के लिए वह समाजसेवा करंगी और चुनाव भी लड़ेंगी।ड्ढr उन्होंने कहा कि 25 साल पहले हमारी स्थिति काफी खराब थी। हमलोगों ने काफी संघर्ष किया। पति हमेशा विकास की बातें ही किया करते थे। कभी किसी का बुरा नहीं किया और न चाहा। वह मिलनसार थे। किसी से दुश्मनी नहीं थी। इसके वाबजूद उनकी हत्या की गयी। यह विश्वास के साथ धोखा किया गया है। उनके पति ने नक्सली क्षेत्र अड़की, तमाड़ और बुंडू में विकास का जाल बिछा दिया था। लोगों की उनके प्रति अटूट आस्था थी। उन्होंने बिरहोरों के लिए काफी कुछ किया। समाज और देश के विकास के लिए मुखर होकर बोलते थे। इससे किसी को तकलीफ हुई होगी, ऐसा नहीं लगता। यह पूछे जाने पर कि आखिर हत्या क्यों हुई? उन्होंने दो मिनट तक चुप्पी साध ली और कहा कि इस पर हमलोग कैसे कुछ कह सकते हैं। यह जांच का विषय है। जांच के बाद ही खुलासा होगा। करीब आधा घंटे की बातचीत में वसुंधरा देवी एक साहसी और धैर्यवान गृहिणी के साथ-साथ नेतृत्व क्षमता से परिपूर्ण दिखी। उन्होंने कहा कि पति की मौत की सूचना किसी ने नहीं दी, ऐसा क्यों किया गया, मुझे नहीं मालूम। अचानक पति का शव घर में लाकर रखा गया। पांच बच्चों के जीवन का भार और घर में अकेली, ऐसी परिस्थिति में मेरी क्या दशा हुई होगी, समझ सकते हैं।ड्ढr वे शहीद हो गये। मेरा सब कुछ लुट गया। इसकी भरपाई कोई नहीं कर सकता। मेर छोटे-छोटे बच्चों को कौन देखेगा। यह सब सोच कर मन टूट जाता है। इतना कहते हीं वह फफक-फफक कर रोने लगती हैं। पीछे बैठा बेटा राजू, जिसने अपने पिता के पार्थिव शरीर को मुखाग्नि दी थी, वह अपनी मां को ढाढस बंधाता है। पास में बैठे अन्य परिजन भी उन्हें सांत्वना देते हैं। ं

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