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रूस को जी-8 से बाहर करना उचित नहीं : आेबामा

अमेरिकी राष्ट्रपति पद के लिए डेमोक्रेट उम्मीदवार बराक आेबामा ने जी-8 देशों से रूस को बाहर करने के अपने प्रतिद्वंद्वी रिपब्लिकन उम्मीदवार जॉन मैक्केन की सलाह का विरोध करते हुए कहा है कि परमाणु प्रसार के खिलाफ जंग में मास्को का सहयोग जरूरी है। समाचार चैनल सीएनएन के साथ साक्षात्कार में मैक्केन के प्रस्ताव के बारे में पूछे जाने पर आेबामा ने कहा कि ऐसा करना गलत होगा। यदि हम परमाणु प्रसार के बारे में कुछ करने जा रहे हैं तो एक बात ध्यान में रखनी होगी कि रूस को भी इसमें शामिल किया जाए। उन्होंने कहा कि पूर्व सोवियत संघ के आसपास बेकार पड़े परमाणु पदाथर्ों और इन देशों में मौजूद तकनीकी ज्ञान का उपयोग करने में हमारा प्रयास रूस के सहयोग के बिना कमजोर पड़ जाएगा। गौरतलब है कि मैक्केन ने कहा था कि लोगों की राजनीतिक आजादी छीनने के दंडस्वरूप वह रूस को जी-8 से बाहर करने के लिए जोर लगाएंगे। समूह आठ के सदस्य देशों में अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, इटली, जर्मनी, कनाडा और जापान भी शामिल हैं। इन देशों के प्रमुख हर वर्ष एक जगह इकट्ठा होकर बड़ी आर्थिक और राजनैतिक चुनौतियों के बारे में विचार विमर्श करते हैं। रूस इस समूह में सबसे बाद में शामिल होने वाला सदस्य है। वह 1में जी-7 में शामिल हुआ था। रूस के प्रधानमंत्री व्लादिमीर पुतिन ने 2006 में सेंट पीटर्सबर्ग में जी-8 शिखर सम्मेलन की मेजबानी की थी जब वह देश के राष्ट्रपति थे। साक्षात्कार के दौरान आेबामा ने अफगानिस्तान समस्या का भी जिक्र किया जहां अमेरिकी नेतृत्व वाली सेनाआें द्वारा देश के पूर्व तालिबान शासकों को खदेड़ने के बाद भी राष्ट्रपति हामिद करजई की अफगान सरकार और 50 हजार सैनिकों वाली नाटो की सेना करीब सात वषर्ों से हिंसा झेल रही है। उन्होंने कहा कि मेरा मानना है कि करजई सरकार अब भी बंकर से नहीं निकल पाई है और अफगानिस्तान को संगठित करने तथा वहां की सरकार, न्यायापालिका और पुलिस बलों को इस प्रकार से सहयोग करने में असफल रही है कि लोगों के अंदर विश्वास जग सके। इस तरह वहां कई तरह की समस्या है। यह पूछे जाने पर कि यदि अमेरिकी सेना अल कायदा के सरगना आेसामा बिन लादेन को पाकिस्तान में पकड़ लेती है तो वह उससे कैसे निपटेंगे, आेबामा ने कहा कि मेरा मानना है कि यदि वह जिंदा पकड़ा जाता है तो उसके खिलाफ सिर्फ अमेरिकी कानून ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय कानून के मुताबिक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि हालांकि मैं पहले भी कह चुका हूं कि मैं मृत्युदंड के पक्ष में नहीं हूं। ऐसी सजा घोर अपराधों के लिए दी जानी चाहिए लेकिन मेरा मानना है कि तीन हजार अमेरिकियों की हत्या की साजिश रचने वाले को ऐसी सजा दी जा सकती है। हालांकि फिलहाल यह कल्पना जैसा लग रहा है फिर भी पहले उसे पकड़ा तो जाए।

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