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कोर्ट के फैसले कारणों पर आधारित होने चाहिए: सुप्रीम कोर्ट

कोर्ट के फैसले कारणों पर आधारित होने चाहिए: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को  हा कि अदालतों के फैसले कारणों पर आधारित होने चाहिए और किसी मामले में एक पक्षकार के पक्ष या खिलाफ में दिया गया निर्णय तर्कसंगत होना चाहिए।

न्यायमूर्ति के एस राधाकृष्णन और न्यायमूर्ति एके सीकरी की खंडपीठ ने कहा कि हमारी राय है कि स्पष्टता के साथ फैसला लिखते समय अदालत से अपेक्षा होती है कि वह किसी निष्कर्ष विशेष या निर्णय पर पहुंचने के पर्याप्त कारणों का जिक्र करें।

न्यायाधीशों ने कहा कि ये कारण ऐसे होने चाहिए जिनसे पता चले कि निर्णय पर निष्पक्षता से विचार के बाद ही पहुंचा गया है। न्यायालय ने इन टिप्पणियों के साथ ही उड़ीसा उच्च न्यायालय का निर्णय निरस्त कर दिया जिसमें फैसले पर पहुंचने के कारणों का जिक्र नहीं था। शीर्ष अदालत ने यह मामला नये सिरे से विचार के लिए उच्च न्यायालय को वापस भेज दिया।

न्यायालय ने कहा कि उसने कभी भी यह सुझाव नहीं दिया कि फैसला बहुत अधिक लंबा होना चाहिए या प्रकरण में निहित मुद्दे के अनुपातहीन होना चाहिए। लेकिन यह ध्यान में रखा जाना चाहिए कि निर्णय प्रभावी और व्यावहारिक होना चाहिए। न्यायालय ने कहा कि चूंकि अदालत को एक कार्यशील निर्णय पर पहुंचना होता है, इसलिए उसके कारण और निष्कर्ष व्यावहारिक होने चाहिए।

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