DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

एमटीएन-आर कॉम डील:अगले सात दिन निर्णायक

इस हफ्ते के अंत तक इस बात का फैसला हो जाएगा कि भारत और साउथ अफ्रीका के व्यापारिक रिश्ते कोई ऐतिहासिक मोड़ लेंगे या पहले की तरह फिल्म, क्रिकेट और टूरिम के पुराने त्रिकोण के दायर में घूमते रहेंगे। साउथ अफ्रीका की सबसे बड़ी टेलीकम्युनिकेशन कंपनी एमटीएन और अनिल अंबानी की रिलायन्स कम्युनिकेशन्स का बहुचर्चित और बहुप्रतीक्षित समझौता इसी हफ्ते फाइनल होना है। दोनों देशों की व्यापारिक बिरादरी सांस रोक कर इस मेगा डील का इंतजार कर रही है क्योंकि उसकी बदौलत ग्लोब पर 70 अरब डॉलर (लगभग 2800 अरब रुपये) के टर्नओवर वाली एक दैत्याकार मोबाइल कंपनी का उदय होने वाला है। दो वजहों से इस सौदे में निर्णायक नतीजा आने की संभावना बढ़ गई है। एक, एक्सक्लूसिव समझौता वार्ता की डेढ़ माह की अवधि को पिछले हफ्ते मिली 15 दिन की एक्सटेंशन 21 जुलाई को खत्म हो रही है और साउथ अफ्रीका की स्टॉक एक्सपर्ट बिरादरी के मुताबिक दूसरी एक्सटेंशन की संभावना न के बराबर है। दूसर, माना जा रहा है कि घरलू मोर्चे पर राजनीतिक समीकरण एकाएक अनिल अंबानी के फेवर में होगए हैं। कांग्रेस से हाथ मिलाने के बाद उनकी हमदर्द समाजवादी पार्टी का सियासी वजन बढ़ गया है जिसकी बदौलत वे मुकेश अंबानी के उस कानूनी फच्चर का इलाज कर सकते हैं जो एमटीएन-आर कॉम वार्ता में बड़े भाई ने फंसाया था। सूत्रों के मुताबिक मुकेश अंबानी की कंपनी को सीधे प्रभावित करने वाले प्रस्तावित विंडफाल टैक्स की इस मामले में महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है। विंडफाल टैक्स की डरावनी संभावना बड़े भाई को एमटीएन-आर कॉम समझौते में थोड़ी नरमी बरतने पर मजबूर कर सकती है। जानकारों के अनुमान के मुृताबिक परदे के पीछे जो कई तरह के मोलभाव सपा और यूपीए में चल रहे हैं, उनमें से यह भी एक है। गौरतलब है कि पहले एमटीएन की भारतीय कंपनी एयरटेल के साथ समझौते की बात चल रही थी जो बाद में खटाई में पड़ गई थी। उसके बाद अनिल अंबानी की कंपनी मैदान में उतरी थी लेकिन रिलायंस इंडस्ट्री ने इस दलील के साथ समझौता वार्ता को अटका दिया था कि रिलायंस समूह के विभाजन के बाद 2006 में हुए एक कानूनी समझौते के मुताबिक आर कॉम की शेयरपूंजी में बड़े फेरबदल के सौदे का पहला हक रिलायंस इंडस्ट्रीज का है। जाहिरा तौर पर अनिल अंबानी की कंपनी ने इस आपत्ति को बेतुका बताकर खारिा किया था लेकिन अंदरखाने उसका गहरा असर आर कॉम-एमटीएन डील पर पड़ा था। बीच में एक संभावना यह जताई गई थी कि शुरू में रिलायंस कम्युनिकेशन्स शेयरपूंजी का बहुत थोड़ा हिस्सा इस सौदे में लगाएगी और बाद में बड़ा सौदा दोनों भाइयों के दो साल पुराने समझौते की मियाद पूरी होने के बादभविष्य में मुृकम्मल करगी। लेकिन सूत्रों का कहना है कि एमटीएन किसी आधे-अधूर सौदे के लिए राजी नहीं था।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title: एमटीएन-आर कॉम डील:अगले सात दिन निर्णायक