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आर्थिक सुधारों में तेजी की उम्मीद

सरकार गठन के कुछ समय बाद से ही विभिन्न मुद्दों पर चली आ रही कांग्रेस और वाम दलों की खींचातानी आखिर परमाणु करार के मुद्दे पर खत्म हो गई। हालांकि सपा ने सरकार को साथ देने का वादा किया है, लेकिन 22 जुलाई को सरकार की परीक्षा बाकी है। उद्योग जगत का मानना है कि सरकार सदन में विश्वास मत हासिल कर लेगी और कांग्रेस के लिए यह वक्त वाम दलों के विरोध के चलते ठंडे बस्ते में पड़ी अपनी योजनाओं को अमली जामा पहनाने का है। एसा माना जा रहा है कि सरकार विनिवेश का दायरा बढ़ाएगी। बीएसएनएल और आईआरसीटीसी समेत दो दर्जन पीएसयू को इस सूची में शामिल किया जा सकता है। बैंकिंग क्षेत्र में विदेशी इक्िवटी धारकों को हिस्सेदारी के आधार पर मताधिकार दिया जा सकता है। प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) बढ़कर 26 से 4प्रतिशत हो सकता है। पीएफआरडीए बिल के द्वारा पेंशन फंड को शेयर बाजार में लगाने की अनुमति मिल सकती है। बिल में ग्राहक को फंड मैनेजर चुनने की छूट होगी। विदेशी निवेशकों की सहायता से रिटेल व्यवसाय की वृद्धि में भी सहयोग मिल सकता है। कंपनियों के लिए पुराने समय से चले आ रहे दिवालिया अधिनियम में संशोधन कर नया बनाया जाएगा, जिससे बीमार कंपनियों को पुर्नजीवित किया जा सके। सपा चाहेगी कि सरकार पेट्रोलियम उत्पादों पर सब्सिडी का दायरा बढ़ाए और इसमें प्राईवेट सेक्टर को भी शुमार किया जाए। इस निर्णय से निजी तेल कंपनियों को तेल पर डिस्काउंट देने में दिक्कत नहीं आएगी। इस निर्णय के बाद पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात को प्रतिबंधित किया जा सकता है। मुकेश अंबानी के स्वामित्व वाली रिलायंस इंडस्ट्रीा लि. इस क्षेत्र की सबसे बड़ी निर्यातक कंपनी है।

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