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नेपाल मंे हिंदी के प्रयोग पर विवाद

नेपाल की नवनिर्वाचित संविधान सभा मं हिंदी क प्रयोग क खिलाफ आवाज उठन लगी है। देश में मधेशी राज्य की मांग कर रहीं भारतीय मूल क लागों का प्रतिनिधित्व करन वाली तीन पार्टियां संविधान सभा मं हिंदी बोलन क कारण नपाली लोगों क निशान पर हैं। इन नेताओं पर लिट्टे प्रमुख प्रभाकरण और पाकिस्तान क जनक मोहम्मद अली जिन्ना के पदचिन्हों पर चलने का आरोप लगाया गया है। मधेशी जनाधिकार फोरम, तराई मधेशी लोकतांत्रिक पार्टी और सद्भावना पार्टी क सदस्यों द्वारा पहल तो हिंदी मं शपथ लन और इसक बाद सदन मं लगातार हिंदी मं बोलन क कारण विवाद पैदा होन लगा है। नपाल की एकीकृत कम्युनिस्ट पार्टी माक्र्सवादी-लनिनवादी क मुख्य सचतक तराई क इलाक क ही नता रामचंद्र झा न कहा कि तराई की पार्टियां प्रभाकरण या जिन्ना बनन का सपना दख रही हैं। एक नपाली साप्ताहिक मं प्रकाशित अपन लख मं झा न लिखा है कि तराई की पार्टियों क 64 संसद सदस्यों न हिंदी मं शपथ ली, जबकि अन्य दलों क तराई क सांसदों न अपनी मातृभाषा मैथिली, भोजपुरी, उर्दू और अवधि मं शपथ ली। जहां अन्य दलों न अपनी मातृभाषा क प्रति प्रम दिखाया, वहीं मधेशी पार्टियों न हिंदी क सामन समर्पण कर दिया। झा ने चतावनी दत हुए कहा कि तराई की पार्टियों की मांग क कारण नपाल का विभाजन हो सकता है जसा कि भारत मं हो चुका है। (एजेंसियां)

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