DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

शांति के मार्ग को अपनाना जरूरी

वहीं मौसम सर्वाधिक प्रिय है जो सुख और शांति के गीत गाएं। आज सुख और शांति के मार्ग को अपनाना जरूरी है ताकि लोगों का जीवन सुखमय हो सके। उक्त बातें साध्वी त्रिशला कुमारी ने रविवार को श्री ओसवाल समाज द्वारा आयोजित अपने स्वागत समारोह में कहीं। उन्होंने कहा कि आषाढ़ शुक्लपक्ष विष्णु शयनी एकादशी से शुरू होता है। चतुर्मासिक का कार्यक्रम और कार्तिक शुक्लपक्ष दवोत्थान एकादशी को संपन्न होता है।ड्ढr ड्ढr इस चार महीने के चतुर्थमास में साधना, योग, तपस्या का कार्यक्रम चलता है। चार महीने की साधना पूरी करने के कारण इसे चतुर्मास कहा जाता है। साध्वी ने कहा कि आषाढ़ शुक्ल पक्ष में विष्णु भगवान सो जाते हैं इस लिए इसे विष्णु शयनी कहा जाता है और कार्तिक शुक्ल पक्ष को विष्णु भगवान जाग जाते हैं इस लिए इसे देवत्थान कहा जाता है। इस मौके पर उपस्थित आईटी मंत्री अनिल कुमार, पटना पश्चिम के विधायक नीतीन नवीन एवं पूर्व केन्द्रीय मंत्री संजय पासवान ने भी अपने विचार व्यक्त किए। इसके पूर्व स्वागत समारोह की शुरुआत मंगलाचरण के साथ हुआ। बाद में अरुणा और निकुां द्वारा स्वागत गीत गाया गया।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title: शांति के मार्ग को अपनाना जरूरी