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अब परीक्षा से फोर्थ ग्रेड कर्मियों को मिलेगा प्रोमोशन

चतुर्थवर्गीय कर्मचारियों को प्रोन्नति पाने के लिए लिखित परीक्षा में शामिल होना होगा। इस संबंध में कार्मिक, प्रशासनिक सुधार एवं राजभाषा विभाग ने संकल्प जारी किया है। संकल्प में लिखा है कि सचिवालय एवं संलग्न कार्यालयों में वर्ग-3 की उपलब्ध रिक्ितयों में दिनचर्या लिपिक एवं टंकक के पदों पर प्रोमोशन के लिए चतुर्थवर्गीय कर्मचारियों को सीमित प्रतियोगिता परीक्षा में शामिल होना होगा। परीक्षा आयोजन का जिम्मा राजस्व पर्षद, झारखंड को सौंपा गया है।ड्ढr भविष्य में राज्य कर्मचारी चयन आयोग झारखंड के गठन के बाद यह परीक्षा आयोग द्वारा आयोजित की जायेगी। विभिन्न कार्यालयों में रिक्ितयों के विरुद्ध 50 फीसदी पद चतुर्थवर्गीय कर्मचारियों की प्रोन्नति से भर जायेंगे। कार्मिक विभाग ने उक्त सीमित प्रतियोगिता में शामिल होने के लिए योग्यता निर्धारित कर दी है। अभ्यर्थी को मैट्रिक या समकक्ष परीक्षा पास होना अनिवार्य है। चतुर्थ वर्ग में 10 वर्ष की सेवा पूरी की हो, स्वास्थ और सेवा संतोषजनक हो और कोई अपराधिक मुकदमा या विभागीय कार्यवाही लंबित न हो।ड्ढr दिनचर्या लिपिक के लिए अभ्यर्थी को दो सौ शब्दों के अनुच्छेद को सुंदर अक्षरों में उतारना होगा। इसके लिए 20 अंक निर्धारित किये गये हैं। डायरी एवं प्रेषण पंजी में कुल 20 प्रविष्टि करना (10), अग्रेजी के अनुच्छेद का हिंदी अनुवाद करना (50), हिंदी के 10 अशुद्ध वाक्यों को शुद्ध करना और सुंदर लिखावट के लिए 10-10 अंक दिये जायेंगे।ड्ढr फोर्थ ग्रेड कर्मचारियों के लिए ड्रेस कोड लागूड्ढr राज्य सरकार ने चतुर्थवर्गीय कर्मचारियों और चालकों के लिए ड्रेस कोड लागू कर दिया है। अब चतुर्थवर्गीय कर्मचारियों को पीली कमीज और काले रंग की फुलपैंट, महिला कर्मी को नीली साड़ी और काले रंग की ब्लाउा में आना अनिवार्य कर दिया गया है। जबकि चालकों को नीली शर्ट और काली पैंट पहनकर आना पड़ेगा। ड्रेस कोड का पालन नहीं करनेवालों पर कार्रवाई होगी।ड्ढr कर्मचारियों को पोशाक भत्ता के रूप में प्रति वर्ष 2500 रुपये का नकद का भुगतान किया जायेगा। इससे पहले सरकार पोशाक खरीद कर इन्हें उपलब्ध कराती रही है। राशि प्रति वर्ष के जनवरी माह में दी जायेगी। इससे पूर्व चपरासियों और चालकों की वर्दी सादे रंग की होती थी। इधर, रिम्स के चतुर्थवर्गीय कर्मचारियों का कहना है कि स्वास्थ्य मंत्री भानु प्रताप शाही के साथ वार्ता में वर्दी भत्ता के रूप में तीन हाार रुपये प्रति वर्ष देने पर सहमति बनी थी। मंहगाई के जमाने में 2500 रुपये में एक जोड़ी पोशाक बनवाना संभव नहीं है। कर्मचारियों ने सरकार से राशि बढ़ाने का आग्रह किया है।

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