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विकास पर विशेषज्ञों की राय जरूरी

उत्तराखण्ड लगातार एक संकट के दौर से गुजर रहा है। यह संकट है उसके भीतरी संसाधनों का आकलन न किया जाना। हमने पानी को तो संसाधन के रूप में पहचान लिया, पर पानी ही हमारे विकास का आधार नहीं है और भी कई संसाधन होंगे, जिनके बारे में हम नहीं जानते। उनके लिए हमें विभिन्न देशों के विशेषज्ञों से राय लेनी चाहिए। जसे कि पहले किसी को पता नहीं था कि असम में चाय की खेती हो सकती है। सबसे पहले अंग्रेजों ने वहां चाय उगाई। हिमाचल में सेब की संभावनाएं थीं-परमार जी ने पहल की। कीनू ने संतरे के मार्केट पर कब्जा कर लिया। यही तो विकास के संसाधन हैं। उत्तराखंड में सैकड़ों प्रकार के फल, सब्जियां व अनाज उग सकते हैं और यहां की अर्थव्यवस्था को मजबूत बना सकते हैं।ड्ढr के एल बलूनी, पाली, बीरोंखाल देशहित राजनैतिक हित से ऊपर वामदलों ने केन्द्र सरकार से समर्थन वापस लेने का जो समय चुना है, वह देश की अस्मिता से खिलवाड़ है क्योंकि उस समय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जी-8 देशों की मीटिंग में भाग लेने जापान गये थे। अन्तरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी आई.ए.ई.ए. की मीटिंग में जाने का जो वक्तव्य प्रधानमंत्री ने जापान में दिया वह परमाणु करार पर अपनाई गई नीति से ही जुड़ा है। इसे समर्थन वापसी का बहाना नहीं बनाया जा सकता। यदि यह कदम प्रधानमंत्री के विदेश जाने से पूर्व अथवा वापिस आने के बाद उठाया जाता तो ठीक रहता। चुनाव मई तक तो होने ही हैं, इसलिए मध्यावधि चुनाव की कोई आवश्यकता भी नहीं है। देशहित राजनीतिक हित से ऊपर है।ड्ढr चम्पत राय जन, देहरादून परमाणु हथियार नष्ट करें परमाणु हथियार मानव सयता के संहार का साधन हैं। इनका दुरुपयोग कभी भी हो सकता है। जब तक विश्व में परमाणु हथियार हैं तब तक शांति की बात करना बेमानी है। खतरा आतंकवादी से ही नहीं है, बल्कि वैज्ञानिक तकनीक व सैनिक स्तर की खामियों से भी है। पिछली सदी में दुनिया के पास लगभग हजार परमाणु हथियार थे, जो वर्तमान में पच्चीस हजार के लगभग रह गये हैं। आज वक्त की मांग है कि इन बचे हुए परमाणु हथियारों को भी नष्ट कर दिया जाये। ये आतंकवादियों के हाथ भी लग सकते हैं। ईश्वर न करे कभी तृतीय विश्व युद्ध का परमाणु कहर दुनिया की सयता को नष्ट कर दे।ड्ढr पारुल शर्मा, हर्रावाला भ्रामक विज्ञापनों पर रोक लगे प्रशासन द्वारा गत वर्ष 21 दिसम्बर को छापा मार कर विभिन्न क्लीनिकों को सील किया गया। इसमें इलेक्ट्रोपैथी के क्लीनिक भी हैं। इन्हें जिलाधिकारी सी.एम.ओ. द्वारा कहा गया था कि यह कोई मान्य पैथी नहीं है, जबकि इस पैथी से हजारों छात्र शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। अगर यह पैथी मान्य नहीं है तो प्रशासन उसके संचालक के विरुद्ध क्यों नहीं कार्रवाई कर रहा। प्रशासन से अनुरोध है कि 1 जुलाई 08 को हिन्दुस्तान में छपे उस विज्ञापन ‘उज्ज्वल भविष्य के लिये समर्पित जेईएच मेडिकल कॉलेज’ का अवलोकन कर इस में प्रवेश लेने वाले छात्रों का भविष्य खराब होने से बचाये।ड्ढr प्रमोद कुमार, देहरादून

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