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परमाणु करार के इंतजार में निजी ऊचरा क्षेत्र

यूक्िलयर डील को लेकर चल रही घमासान सियासत के बीच भारत के बिजली उत्पादकों की ख्वाहिश है कि अंतरराष्ट्रीय परमाणु व्यापार का रास्ता जल्दी खुल जाए। भारतीय बिजली कंपनियों को इसमें अपने लिए तमाम संभावनाएं नजर आ रही है। टाटा समूह के चेयरमैन रतन टाटा तो एक अरसे से भारत के न्यूक्िलयर एनर्जी क्षेत्र में लम्बी छलांग लगाने की वकालत करते रहे हैं। उनके समूह की टाटा पावर के साथ-साथ रिलायंस पावर, जिंदल पावर और अन्य क्षेत्रों की कंपनियां चाहती हैं कि वे भी इस संभावनाओं से लबरेज क्षेत्र में अपने लिए जगह बनाएं। बिजली कंपनियों के विशेषज्ञ कह रहे हैं कि डील होने के बाद भारत में यूरेनियम की सप्लाई नियमित रूप से होने लगेगी। उस स्थिति में अनुमानत: न्यूक्िलयर पावर प्लांट स्थापित करने की गति बहुत तेज हो जाएगी। सरकार अकेले इनके लिए पूंजी जुटाने की हालत में नहीं होगी इसलिए देर सबेर निजी क्षेत्र को भी परमाणु बिजली उत्पादन के काम में शामिल किया जाएगा। अब भी बेशक परमाणु ऊरा कानून के तहत केवल सरकारी कंपनियां ही परमाणु बिजलीघर स्थापित कर सकती हैं, लेकिन उन्हें उपकरणों की सप्लाई का काम निजी कंपनियां ही कर रही हैं। स्वतंत्र अर्थव्यवस्था वाले देशों में परमाणु सेक्टर में निजी क्षेत्र खासा सक्रिय है।

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