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हंगामे से लोकतंत्र का कामकाज प्रभावित होता है: राष्ट्रपति

हंगामे से लोकतंत्र का कामकाज प्रभावित होता है: राष्ट्रपति

राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने कहा कि भारत के लोकतंत्र में चर्चा (डिबेट), असहमति (डिसेन्सन) और निर्णय (डिसिजन) के बाद हंगामा (डिसरप्शन) चौथा डी बन गया है जिससे संसदीय लोकतंत्र का कामकाज प्रभावित हो रहा है।

मेघालय विधानसभा के विशेष सत्र को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि आजकल मैं देख रहा हूं कि चौथा डी लोकतंत्र में घुस आया है जो हंगामा है। संसद और राज्यों की विधानसभाओं में लगातार हंगामे का जिक्र करते हुए मुखर्जी ने कहा कि चौथा डी हर निर्वाचित सदस्य को सदन में अपना विचार व्यक्त करने के अवसर से रोकता है।

उन्होंने कहा कि अगर हम काम नहीं करें और अनुशासनहीनता एवं सदन की कार्यवाही के दौरान हंगामे में शामिल रहें तो लोगों के साथ यह कपट है। राष्ट्रपति ने कहा कि निर्वाचित सदस्यों के लिए योगदान करने और लोगों के साथ न्याय करने का बेहतरीन तरीका है कि वे कभी भी हंगामा नहीं करें और दूसरों को बोलने दें।

तीन अन्य डी के महत्व की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि हर मुद्दे पर सदन में चर्चा की जानी है। सदस्यों को असहमति वाले अपने विचार रखने का पूरा अधिकार है लेकिन चर्चा के बाद निर्णय किया जाना है और उसे लागू करना है। उन्होंने कहा कि निर्वाचित सदस्य के रूप में मेरा मानना है कि मैंने काफी कुछ सीखा कि सांसद को क्या करना चाहिए, किस सत्र में अवश्य हिस्सा लेना चाहिए, कभी हंगामा नहीं करना चाहिए और दूसरों को बोलने देना चाहिए।

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