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उत्तर प्रदेश में बाढ़ से स्थिति हुई गंभीर

नदियों के जलभरण क्षेत्रों तथा उत्तर प्रदेश के अधिसंख्य स्थानों पर लगातार चार दिन से हो रही मूसलाधार बरसात की वजह से उफनती राप्ती, शारदा, सरयू और घाघरा की बाढ़ और कटान से गोन्डा, बाराबंकी, देवरिया, संतकबीरनगर, फैजाबाद, बहराइच और सिद्धार्थनगर समेत राय के 13 जिलों में स्थिति गंभीर हो गई है। इन नदियों में आए उफान से एक हजार से यादा गांवों में बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया है। बाढ़ और अतिवृष्टि से इन जिलों में सैकड़ों हेक्टेयर कृषि भूमि भी प्रभावित हुई है, जबकि गोन्डा में राहत एवं बचाव के काम में मदद के लिए पीएसी की एक कंपनी तैनात कर दी गई है। भारी बरसात के दौरान कच्चे मकान ढहने से पिछले 24 घंटों में राय के संतकबीरनगर और कुशीनगर में दो-दो तथा मैनपुरी और देवरिया में एक-एक व्यक्ित की मलबे में दबकर मरने की सूचना है। इस बीच गोन्डा से प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार समूचे इलाके में उफनती घाघरा ने तटवर्ती इलाकों में कहर बरपाना शुरू कर दिया है। घाघरा की बाढ़ बाराबंकी स्थित एल्गिनब्रिज के लिए भी खतरा बनती जा रही है। गोन्डा जिले की तरबगंज और कर्नलगंज तहसीले घाघरा की बाढ़ से सर्वाधिक प्रभावित हुई हैं, जहां सैकड़ों हेक्टेयर भूमि जलमग्न हो गई है और ढ़ाई सौ से यादा गांवों और मजरों में बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया है। सिद्धार्थनगर से प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार मूसलाधार मानसूनी वर्षा से पूर्वांचल के गोरखपुर और बस्ती मंडलों के महराजगंज संतकबीरनगर, कुशीनगर, बस्ती, सिद्धार्थनगर, गोरखपुर और देवरिया जिलों में सामान्य जनजीवन अस्तव्यस्त हो गया है। इन मण्डलों के सात जिलों में पिछले चार दिन से लगातार हो रही जबरदस्त बारिश से घाघरा, राप्ती, गण्डक, गोर्रा, नारायणी और बूढ़ी राप्ती नदियों के उफनाने से करीब 400 गांव बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। घाघरा नदी का जलस्तर खतरे के निशान के करीब पहुंच जाने की वजह से बस्ती, संतकबीरनगर, गोरखपुर और देवरिया जिलों के करीब 300 गांव बाढ़ की चपेट में हैं और प्रशासन ने इनमें से 100 गांवों को खाली करने को कह दिया है।

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