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रैनबैक्सी पर लटकी तलवार

रैनबैक्सी का करीब दो दिन पहले विवादों में घिरना उसके लिए काफी खतरनाक साबित हो सकता है। रैनबैक्सी पर लगे आरोप यदि अमेरिकी अदालत में साबित हो गए तो यह रैनबैक्सी के लिए अच्छा-खासा महंगा साबित होगा। अमेरिकी न्यायालय ने मामले से जुड़े दस्तावेज पेश करने की हिदायत कंपनी को दी है। अमेरिकी अथॉरिटीज ने रैनबैक्सी पर वहां के मानकों का पालन न करने का आरोप लगाया है। विशेषज्ञों के मुताबिक यह आरोप सिद्ध होने पर कंयूमर को दवा का रिएक्शन हो जाने से जुड़े मामलों से भी जूझना पड़ सकता है। ऐसे मामलों में पहले भी कई कंपनियों को भारी हर्जाना देना पड़ा है। मर्क, फाइजर जसी कंपनियां भी ऐसे मामलों में करोड़ों का हर्जाना दे चुकी हैं। मर्क ने क्लास एक्शन सूट के तहत सितम्बर 2004 में एक ऐसे मामले में 4.85 बिलीयन (आज के 20,758 करोड़) का मुआवजा दिया। वहीं फाइजर ने भी अप्रैल 2005 में अपने हरेक पेशेंट को 40 से 50 हजार डॉलर की औसत से भुगतान किया था। देखना यह है अगर रैनबैक्सी मामला हार जाती है तो कंयूमर लायबिलिटी क्लेम के तहत कंपनी को कितने का चूना लगता है। अमेरिकी सीएफआर के क्लॉज-21 के नियम काफी सख्त हैं।

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