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विस की राजस्व कमेटी ने उठाया सवाल

झारखंड में शराब कारोबार खासा चर्चित होता जा रहा है। शराब की दुकानों की बन्दोबस्ती नहीं होने के कारण 15 दिनों से सभी दुकानें बंद हैं। बाहर से चोरी-छिपे शराब लाकर बेची जा रही है। सरकार जिलों में हुए शराब दुकानों की बन्दोबस्ती के टेंडर का निपटारा भी नहीं कर रही है। तीन प्रमुख जिलों के कारण सभी जिलों के टेंडर को रद्द करने की तैयारी चल रही है। ताकि एक साथ पूर राज्य का टेंडर सिंडिकेट के हाथों सौंप दी जाये। सरकार को हर दिन औसतन पचास लाख से ज्यादा का राजस्व नुकसान हो रहा है।ड्ढr झारखंड विधानसभा की राजस्व कमेटी के सभापति इंदर सिंह नामधारी ने सवाल उठाया है कि शराब दुकानों की बन्दोबस्ती में हो रहे विलंब से सरकार को हर दिन लाखों रुपये राजस्व का नुकसान हो रहा है। आखिर इस नुकसान के लिए जिम्मेवार कौन है? उन्होंने बताया कि पिछले दिन कमेटी की बैठक में राज्य के बीस जिलों के डीसी और उत्पाद अधिकारी बुलाये गये थे। समीक्षा के दौरान कुछ जिलों में गड़बड़ी पायी गयी थी। इन जिलों के अधिकारियों को हिदायत दी गयी थी कि जल्द से जल्द सुधार कर 1ो होनेवाली अगली बैठक में शामिल हों।ड्ढr सभापति का कहना है कि सरकार को राजस्व जसे मामलों पर कतई लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए। चारों ओर चर्चा है कि शराब की बन्दोबस्ती सिंडिकेट को देने की अंदर ही अंदर साजिश चल रही है। नामधारी ने कहा कि जिन 20 जिलों की बन्दोबस्ती के लिए टेंडर का निपटारा हो चुका है, सरकार को समय पर फैसला ले लेना चाहिए। क्योंकि जब तक दुकानें बंद रहेंगी, राजस्व का नुकसान होगा।

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