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‘स्वघोषित’ उम्मीदवारी से भाजपा पसोपेश में

पूर्व केन्द्रीय मंत्री शत्रुघ्न सिन्हा जैसे कुछ बड़े नेताओं द्वारा लोकसभा की ‘स्वघोषित’ उम्मीदवारी को लेकर भाजपा नेतृत्व पसोपेश में है। धर्मसंकट का यह आलम है कि प्रमुख नेता भी कुछ कहने से कतरा रहे हैं। हालांकि दबे स्वर में वे यह सवाल जरूर उछाल रहे हैं कि बिना चुनाव समिति की औपचारिक बैठक हुए कोई खुद को उम्मीदवार कैसे घोषित कर सकता है। अलबत्ता श्री सिन्हा को सीधे केन्द्रीय नेतृत्व से ही ‘ग्रीन सिग्नल’ मिल गया हो तो अलग बात है। वैसे प्रक्रिया यह है तो प्रदेश चुनाव समिति पहले उम्मीदवारों के नामों का पैनल केन्द्रीय चुनाव समिति को भेजती है।ड्ढr ड्ढr इसके बाद अंतिम सूची जारी होती है। लेकिन अभी तो नए परिसीमन के मद्देनजर क्षेत्रवार समीक्षा बैठकें भी सिलसिलेवार ढ़ंग से शुरू नहीं हुई हैं। इसके बाद जातीय समीकरणों का गुणा-भाग चलेगा। फिर गठबंधन धर्म के नाते हर नाम पर जद यू से विमर्श होगा। मगर फिलहाल तो भाजपा-जद यू के बीच सीटों का विधिवत बंटवारा भी नहीं हुआ है। इससे पहले ही ‘बिहारी बाबू’द्वारा खुद को पटनासाहिब से उम्मीदवार घोषित किए जाने से इस सीट पर नजरं गड़ाए अन्य नेताओं की पेशानी पर बल पड़ गए हैं। उनके ‘सवालों’ का नेतृत्व को कोई जवाब नहीं सूझ रहा है। इस बाबत प्रदेश अध्यक्ष राधामोहन सिंह और प्रवक्ता विनोद नारायण झा ने कहा कि शत्रुजी पार्टी के राष्ट्रीय स्तर के नेता हैं। वह जहां से भी चुनाव लड़ना चाहेंगे उनकी इच्छा का आदर किया जाएगा। उधर दरभंगा में केन्द्रीय पर्यवेक्षक अजय मारू के सामने ही पूर्व सांसद कीर्ति आजाद और विधान परिषद के सदस्य संजय झा के समर्थकों के बीच भिड़ंत भी चर्चा का विषय है। श्री झा समर्थकों का एतराज था कि आखिर इस बैठक में ‘स्वघोषित’ उम्मीदवार श्री आजाद आखिर किस हैसियत से शामिल हो रहे हैं।

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