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घरों में सिमटी जिंदगानी

घरों में सिमट गयी है जिंदगी। बेडरूम से टायलेट तक एक ही नजारा है। कीड़े-मकोड़े ड्राइंग रूप में घर किए हुए हैं। आंगन में मेढ़क टर्र-टर्र कर रहे हैं। रसोई बनाना भी मुश्किल है। चौकी व टेबुल पर सिलेंडर रख किसी तरह कुछ खाना बनाने की कोशिश हो रही है। कई घरों में तो लोग होटलों में जाकर खा रहे और परिजनों के लिए पैक करा रहे हैं। घर से बाहर निकलना मुश्किल है तो सामान कैसे लाए जाएं।ड्ढr ड्ढr बड़ी मुश्किल से बचते-बचाते घर से निकल जरूरी सामान लाने को कोशिश हो रही है। बच्चों का स्कूल जाना भी बंद है। घर में भी पानी घुसने से किताबों को बचाना मुश्किल हो गया है। पढ़ाई तो चौपट ही हो गयी है।ड्ढr कांग्रस मैदान, राजेन्द्रनगर रोड नं. 1, 3, हनुमाननगर, एलआईजी, एमआईजी, रंटल, जनता फ्लैट, लोहियानगर, बैंकमैन कालोनी, डिफेंस कालोनी, चित्रगुप्तनगर, मुन्नाचक, खेतान मार्केट, दरिायापुर, ठाकुरबाड़ी रोड, बुद्धमूर्ति,एसके नगर आदि में कुल मिलाकर घर टापू बन गए हैं। न लोग आफिस जा रहे हैं और न बच्चे स्कूल। जिनके घर एकमहल्ले हैं उनकी तो जिंदगी नरक बनी हुई है। दोमहल्ले वालों को थोड़ी राहत है पर जिंदगी कैद होकर रह गयी है। कुछ घरों से तो लोगों का पलायन भी होना शुरू हो गया है। जिधर जलजमाव नहीं उधर का रुख लिया जा रहा है। कांग्रस मैदान की सरिता सिन्हा ने कहा कि अब तो दस-पंद्रह दिन तक घरों में ही कैद रहना है। नाते-रिश्तेदार भी घर नहीं आ रहे हैं। रंटल फ्लैट में चौकी पर रसोई बना रही मीना देवी ने कहा कि हर साल का यही रोना है। रात में सांप-बिच्छू निकल रहा है। जिंदगी आफत बन गयी है।

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