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पेट्रोल-डीचाल,गैस के लिए हाहाकार

राजधानी में पेट्रोल, डीाल और गैस की किल्लत हो गयी है। इसके कारण लोगों को काफी परशानी हो रही है। पेट्रोल-डीाल की सही तरीके से आपूर्ति नहीं होने के कारण यह स्थिति बनी हुई है। राजधानी के कई पेट्रोल पंप पर लोग डीाल और पेट्रोल के लिए एक पंप से दूसर पंप पर दौड़ लगाते दिखे। शहर के एक दर्जन से अधिक पेट्रोल पंपों पर यही आलम रहा। राजधानी से सटे कई इलाकों में पेट्रोल ब्लैक में 70 रुपये लीटर बिका। पेट्रोल पंपों पर दोपहिये और चारपहिये वाहनों की लंबी कतार लगी रही। आने वाले दिनों में पेट्रोल, केरोसिन और डीाल की आपूर्ति पूर राज्य में प्रभावित होने की आशंका है। सोमवार को इंडियन ऑयल कारपोरशन नामकुम डिपो से टैंकर चालकों ने डीाल, पेट्रोल और केरोसिन का उठाव नहीं किया। जिसका असर मंगलवार को भी दिखा। मामले ने तब तूल पकड़ा था जब डिपो प्रबंधक सुशांत कुमार ने यह निर्देश जारी कर दिया कि जिस टेंकर के डिलीवरी पाइप में गाड़ी नंबर नहीं लिखा होगा वह टेंकर परिसर में नहीं घुसेगा। इस पर चालकों ने नाराजगी जाहिर कर तेल का उठाव नहीं किया।ड्ढr दूसरी तरफ शहर में गैस की भारी किल्लत हो गयी है। घंटों लाइन लगने के बाद भी लोगों को गैस सिलिण्डर नहीं मिल रहा है। बुकिंग के बावजूद गैस की डिलिवरी नहीं हो रही है। शहर के कई इलाके ऐसे हैं, जहां गैस नहीं मिलने के कारण कई घरों में चूल्हा नहीं जला। हटिया क्षेत्र में विगत एक पखवाड़े से घरलू गैस सिलिंडर की किल्लत बरकरार है। इंडियन ऑयल के क्षेत्रीय अधिकारियों और डिप्टी मेयर के हस्तक्षेप के बाद भी स्थिति में कोई सुधार नहीं आया है। नंबर लगाने के बाद भी एक पखवाड़े से कई लोगों को गैस नहीं मिला। सांसद प्रतिनिधि रणविजय सिंह ने स्थानीय गैस वितरक समेत डिप्टी मेयर और इंडियन ऑयल के क्षेत्रीय प्रबंधक श्रीमती किड़ो से बात की। प्रबंधक ने आश्वस्त किया कि समस्या का समाधान शीघ्र होगा।ड्ढr आपूर्ति ठप करने की चेतावनीड्ढr झारखंड पेट्रोलियम ट्रांसपोर्ट श्रमिक यूनियन ने स्थानीय अधिकारियों को 15 दिन का अल्टीमेटम दिया है। यूनियन ने चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी गयी, तो इसके लिए पूर राज्य में आंदोलन छेड़ा जायेगा और पूर झारखंड में केरोसिन, डीाल और पेट्रोल की आपूर्ति ठप कर दी जायेगी। इसकी जिम्मेवारी प्रबंधन और अधिकारियों की होगी। यूनियन ने कहा है कि डीलरों के मासिक कोटे की व्यवस्था समय पर होनी चाहिए। ठेका श्रमिकों के इपीएफ का लंबित वार्षिक ब्योरा प्रबंधन को देना होगा। नामकुम डिपो में व्याप्त भ्रष्टाचार को बंद करना होगा।

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