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घंटों की खुशी मिनटों में हुई गम में तब्दील

गांव की बेटी की शादी में शरीक होने आए मंहगुपुर टोला के लोग जिसमें ज्यादातर महिलाएं और बच्चे शामिल थे यह अहसास नहीं रहा होगा कि पांच घंटे तक चले विवाह रस्म की खुशियां पांच मिनट में गम में तब्दील हो जाएगी। मंदिर में पांच घंटे तक वैवाहिक गीत गाने वाली महिलाओं को क्या पता था कि कुछ ही देर बाद उनकी आवाज हमेशा के लिए खामोश हो जाएंगी। गंगा सेतु के पास घटी घटना जिसमें इस गांव के पांच घर बर्बाद हो गए के सभी लोग काफी गरीब है। शायद मौत को आना था इसलिए नौ जुलाई के लिए तय शादी किसी कारणवश चौदह जुलाई तक टल गई थी। मृतक के परिान इस बात को बार-बार दोहरा रहे हैं कि नौ को शादी होती तो शायद किसी का परिवार नहीं खोता।ड्ढr ड्ढr गांव के द्वारका पांडे जिनकी पत्नी विमला देवी (48) और दो पुत्रियां यशोदा (14) व आरती (22) इसे हादसे में मारी गई भूमिहीन हैं। उन्होंने डेढ़ वर्ष पूर्व ही आरती का ब्याह लोदीपुर में किया था। रोते हुए द्वारिका पांडे कहते है कि ‘अब हम ओकर ससुराल वाला के जवाब देवई।’ इसी गांव के मिथिलेश शर्मा जिनकी पत्नी च्िंातावती व बेटी कंचन (18) हादसे में मारी गई, बिल्कुल टूट से गए है। गांव के सुरश सिंह जिनकी पुत्री की शादी में सभी लोग आए थे को अपराध बोध सता रहा है। दुखी सुरश कहते है कि ‘भगवान न यह क्या किया।’ अस्पताल के बाहर लगे एक ठेले पर गमगीन मुद्रा में बैठे सुरश कभी आसमान की ओर ताकते तो कभी चित्कार करते परिानों की ओर।

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