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परमाणु संधि-परिचय

परमाणु समझौते का मसौदा अब आम हो गया है। लेकिन कोई खास फर्क नहीं पड़ा। एक तो इसलिए कि उसे पढ॥कर किसी को कुछ समझ में नहीं आने वाला। दूसरी यह कि लोगों ने उसे समझने के आसान तरीके निकाल लिए हैं, इसलिए उसे पढ़कर उस पर राय व्यक्त करने जसी बेमतलब की मेहनत कोई नहीं चाहता। इसे समझने के पूर्व ये आसान तरीके यहां बताए जा रहे हैं। 1. सबसे सरल तरीका वामपंथियों का है। उन्हें परमाणु संधि से इसलिए दिक्कत है क्योंकि वह अमेरिका के साथ होनी है। वामपंथी इस बात पर सबसे ज्यादा शोर मचा रहे थे कि मसौदा उन्हें क्यों नहीं दिखाया गया हालांकि वे यह भी स्पष्ट कर चुके थे कि मसौदा दिखाने पर भी उनका रवैया नहीं बदलेगा। यह रुख कई मामलों में फायदेमंद है। आमतौर पर लोग यह कहेंगे कि आप गलत तो हैं लेकिन सिद्धांतवादी हैं। 2. भाजपा का रुख दूसरा है। उन्हें परमाणु संधि से इसलिए दिक्कत है क्योंकि उन्हें कांग्रेस से दिक्कत है, अमेरिका से नहीं। इस मामले में उनका रुख वामपंथियों के ठीक उलट है क्योंकि वामपंथियों को कांग्रेस से नहीं, अमेरिका से दिक्कत है। इसके बावजूद भाजपा और वामपंथियों को एक-दूसर से कोई दिक्कत नहीं है क्योंकि वामपंथी और भाजपाई मिलकर अमेरिका का कुछ नहीं बिगाड़ सकते, कांग्रेस का तो बिगाड़ सकते हैं। सब मानते हैं कि यह अवसरवादी लाइन है, लेकिन भौतिक लाभ भविष्य में संभव है। 3. कांग्रेस की लाइन यह है कि परमाणु समझौता देश के लिए फायदेमंद है, ऐसा इसलिए कि सोनिया जी ने कह दिया है। इससे मीडिया में भरपूर समर्थन मिलेगा, लेकिन कांग्रेस में नहीं, क्योंकि कांग्रेसी न तो किसी का समर्थन करते हैं, न विरोध। उनके पास इस लिए फुर्सत ही नहीं है। कांग्रेसी अपने ही मुद्दे के समर्थन की जहमत नहीं उठाते, वह काम भी उन्होंने दूसरों पर छोड़ दिया है। 4. संप्रग के अन्य घटक- ये सबसे ज्यादा मजबूर हैं क्योंकि जब संप्रग नामक ओखली में सिर दिया है तो क्या कर सकते हैं। 5. अन्य- फिलहाल सबसे फायदे में ये लोग हैं। ये राष्ट्रहित में फैसला करने के लिए स्वतंत्र हैं। वे फिलहाल हिसाब लगा रहे हैं कि राष्ट्रहित कहां कितना है। लेकिन यह रुख उन लोगों के लिए फायदेमंद नहीं है जो सांसद नहीं हैं या जिनके पास सांसद नहीं हैं, क्योंकि उन्हें राष्ट्रहित में कुछ नहीं मिलेगा। हमारा सुझाव- वामपंथियों और भाजपाइयों की मिली-ाुली लाइन सर्वश्रेष्ठ है। सिद्धांतवादी छवि भी बनी रहेगी, भविष्य में लाभ की भी गुंजाइश है।

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