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डब्ल्यूटीओ का भविष्य कृषि पर : कमलनाथ

चुनावी सरगर्मियों और महंगाई जसे मसलों पर विपक्ष से घिरी और आगामी 21 जुलाई को विश्वास मत हासिल करने की अंकगणित से जूझ रही यूपीए सरकार कम से कम अब डब्ल्यूटीओ जसे संवेदनशील मसले पर विपक्षियों को उंगली उठाने का मौका हरगिज नहीं देना चाहती। लिहाजा, प्रधानमंत्री डॉ.मनमोहन सिंह की सीधी निगरानी में वाणिज्य मंत्रालय ने 21 जुलाई से जिनेवा में शुरू हो रही डब्ल्यूटीओ मिनी मिनिस्टीरियल (डब्ल्यूटीओ के चुनिंदा खास सदस्यों की बैठक) के लिए खास रणनीति तैयार की है। इस रणनीति के जरिए भारत विभिन्न साथी सदस्य देशों के साथ गठाोड़ कर सेवा, कृषि और उद्योग क्षेत्रों में अपने पक्ष में फैसला कराने की लामबंदी करगा। इसके बावजूद अगर भारत के पक्ष में फैसला नहीं होता तो वह इस समझौता प्रक्रिया से खुद को बाहर कर लेगा। वाणिज्य मंत्री कमलनाथ ने यहां दूक शब्दों में कहा कि अगर भारत के पक्ष में समझौता नहीं होता तो हमार सामने समझौता न करने अथवा उस प्रकि्रेया से खुद को बाहर लेने के अलावा और कोई विकल्प नहीं होगा। वाणिज्य मंत्रालय के आला अधिकारियों और शीर्ष उद्योग प्रतिनिधियों के साथ सम्मेलन के लिए यहां से रवाना होने से पहले संवाददाताओं से बात करते हुये वाणिज्य मंत्री कमलनाथ ने साफ कहा कि दरअसल सेवा और कृषि क्षेत्र भारत के लिए जीने-मरने वाले सवाल बन गये हैं। इन पर भारत की इच्छा के मुताबिक विकसित देश समझौते के लिए राजी नहीं होते हैं तो यह समझौता हरगिज नहीं हो पाएगा। उन्होंने कहा कि यह बात उन्होंने डब्ल्यूटीओ महानिदेशक पास्कल लॉमी के साथ बातचीत में पहले से ही साफ कर दी है और इन पर अन्य साथी देशों के अलावा चीन, ब्राजील और कई अन्य प्रमुख देशों से बात की जा रही है।

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