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पार्टी लाइन को मानेंगे अटवाल

लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्ाी और उनकी पार्टी सीपीएम के बीच लोकसभा अध्यक्ष पद से त्यागपत्र देने को लेकर भले ही मतभेद हों लेकिन शिरोमणि अकाली दल के सदस्य और लोकसभा उपाध्यक्ष चरणजीत सिंह अटवाल पार्टी लाइन पर चलते हुए विश्वास प्रस्ताव के खिलाफ वोट देंगे। यह और बात है कि माकपा और अन्य वाम दल 22 जुलाई को लोकसभा में सरकार द्वारा लाए जाने वाले विश्वास प्रस्ताव के खिलाफ वौट डालने के मामले में कोई समझौता करने को तैयार नहीं हैं, लेकिन शिरोमणि अकाली दल में परमाणु करार को लेकर मतभेद जारी हैं। जानकारों का कहना है कि इस दल के आठ में से कम से कम दो सांसद विश्वास प्रस्ताव के पक्ष में भी वोट दे दें। पूर्व प्रधानमंत्री आई.के.गुजराल ने अकालियों को इस करार के फायदों की जानकारी देने के लिए क्लास भी ली थी। उनके पुत्र तथा अकाली दल के राज्य सभा सांसद नरश गुजराल भी अक्सर इस क्लास का जिक्र करते हैं। पार्टी में इस करार के हामी लोगों का कहना है कि पार्टी को देश के पहले सिख प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह का इस मुद्दे पर साथ देना चाहिए। सूत्रों के मुताबिक ऊहापोह की इसी स्थिति के कारण संभवत: पार्टी ने अब तक अपने सांसदों के लिए व्हिप जारी नहीं किया है। जाहिर है अकाली दल में कहीं कुछ ठीक नहीं है।

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