जाफरिया मसजिद में जश्न-ए-अली - जाफरिया मसजिद में जश्न-ए-अली DA Image
17 नबम्बर, 2019|9:10|IST

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जाफरिया मसजिद में जश्न-ए-अली

अंजुमन-ए-ााफरिया के तत्वावधान में 16 जुलाई को चर्च रोड अंसारनगर स्थित मसजिद-ए-ााफरिया में जश्न-ए-अली का आयोजन किया गया। हारत अमरूल मोमेनिन अली इब्ने अबु तालिब की पैदाइश के अवसर पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया था।ड्ढr पूर्व घोषित कार्यक्रम के अनुसार बाद नमाज इशा अंजार नकवी के तिलावत-ए-कुराअन से जलसे की कार्रवाई शुरू की गयी।ड्ढr शायरों ने हारत अली की शान में कसीदे पढ़े। मौलाना सैयद तहाीबुल हसन रिावी ने जलसे को संबोधित करते हुए कहा कि नबी करीब ने इरशाद फरमाया-मैं शहर इल्म हूं और अली उसका दरवाजा है। अदल वह दवा है। अली सबसे बेहतर हैं। अली के लिए एलान किया। अली हक के साथ, हक अली के साथ। अली कीाात वह महवर है जिसका कोई सानी दुनिया में नहीं मिलता। ऐसे सानी की वलादत के दिन पूरी दुनिया जश्न मनाती है। यह जश्न इंसान के साथ जिन्नों व मलिक भी मनाते हैं।ड्ढr अजीम हैदर भागलपुरी, यादगार नक्वी, बाकर राा, कासिम रांचवी, अता छपरावी, डॉ मजहर अब्बास आदि ने शाने अली मेंअपनी आवाज से समा बांध दिया।ड्ढr नेहाल हुसैन सरैयावी कार्यक्रम का संचालन कर रहे थे। मासूम राा, नदीम हुसैन, कादिर हुसैन सैयद इकबाल हुसैन आदि इस अवसर पर मौजूद थे।ड्ढr सीएम से मिलेड्ढr ऑल झारखंड माइनोरिटी वेलफेयर सोसाइटी का एक शिष्टमंडल बुधवार को सीएम मधु कोड़ा और शिक्षा मंत्री बंधु तिर्की से मिला। प्रदेश अध्यक्ष मो इसलाम के नेतृत्व में मिले शिष्टमंडल ने झारखंड के मुसलमानों की विभिन्न समस्याओं से संबंधित मांग पत्र दिया। संविधान की धारा 341 के तहत हिंदू दलितों की तरह दलित मुसलमानों को आरक्षण की सुविधा देने, धारा 342 के तहत मूलवासी मुसलमानों को आदिवासी घोषित करने की मांग की गयी।

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