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दो ग्रहण और पांच शनिवार करंगे बवाल शनिवार

जुलाई से श्रावण महीना आरंभ हो रहा है, जो शनिवार 16 अगस्त तक चलेगा। सावन में चार सोमवार और पांच शनिवार पड़ रहे हैं। सावन का पहला कृष्ण पक्ष 14 दिन का होगा। इसमें दशमी तिथि की हानि है। अमावस्या एक अगस्त शुक्रवार को खंडग्रास सूर्य ग्रहण पुष्य नक्षत्र की कर्क राशि पर लगेगा। रांची में शाम 4.16 से 6.03 बजे तक, पटना में 4.11 से 6.02 बजे, गया में 4.13 से 05.02 बजे तक, भागलपुर में 4.12 से 6.01 बजे शाम तक ग्रहण दिखायी देगा। ग्रहण का दुस्प्रभाव हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो नामाक्षर से शुरू होनेवाले व्यक्ितयों, शहरों पर होगा। मेष, मिथुन, कर्क, सिंह, वृश्चिक, धनु, मकर, मीन राशिवाले व्यक्ितयों के लिए ग्रहण व्यर्थ फल देनेवाला है। इस ग्रहण के ठीक 15 दिन बाद श्रावण पूर्णिमा 16 अगस्त को खंडग्रास चंद्रग्रहण है। यह घनिष्ठा नक्षत्र के मकर और कुंभ राशि पर लगेगा। यह शनिवार रात्रि 11 बज कर 52 मिनट से भोर 4.15 मिनट तक रहेगा। इस ग्रहण से वृष, मिथुन, कर्क, कन्या, तुला, धनु, मकर, कुंभ राशिवालों के जातकों को परशानियां उठानी पड़ेंगी। इस तरह यह वर्ष 2008 का अंतिम ग्रहण होगा। अगला ग्रहण 26 जनवरी 200ो वलयाकार कंकणाकृति सूर्य ग्रहण भारत में भी दिखायी देगा। रक्षा बंधन पर चंद्रग्रहण और दिन के 1.57 तक भद्रा है। इस समय के बाद रक्षा बंधन का विधान है, लेकिन शास्त्र का मत है कि रात्रि में प्रवेश किया हुआ भद्रा दिन में प्रथम शून्य हो जाता है। अत: शनिवार प्रात: रक्षा बंधन किया जा सकता है। भद्रा का प्रवेश शुक्रवार रात्रि 1.38 से पाताल में है। जल नक्षत्र पुष्य 20 जुलाई को प्रवेश कर रहा है। फलस्वरूप अतिवृष्टि से जन-जीवन असामान्य होगा, राजनीतिक विग्रह की संभावना है।ड्ढr ग्रहण फल : एक मास में दो ग्रहण संग्राम, उत्पात का सूचक है। प्रजा में अनीति, दुराचार, दाम्पत्य विवाद, वैश्य और शूद्र वर्ग के लिए हितनाशक है। वनवासी, विशिष्ट व्यक्ितयों के परिवारों, आयुध जीवियों को कष्ट होगा।ड्ढr पं. रामदेव पांडेय

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