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फेजवाइज बदले जा रहे बिजली के तार

शहर में पुराने जर्जर तारों को बदलने का काम चरणबद्ध तरीके से चलाया जा रहा है। एपीडीआरपी योजना के तहत तारों को बदलने के साथ ही आपूर्ति व्यवस्था सुदृढ़ करने का काम किया जा रहा है। राजधानी सहित पूर सूबे में यह काम विभिन्न चरणों में किया जा रहा है।ड्ढr ड्ढr राजधानी के कई इलाकों में पुराने तारों को बदलने का काम पूरा हो चुका है पर अभी भी काफी इलाके बचे हुए हैं। दूसरी ओर साथ ही तार टूटने के झंझट से बचने के लिए ‘अंडरग्राउंड केबलिंग’ भी हो रहा है। फिलहाल नूतन राजधानी अंचल यानी पश्चिम भाग में यह काम चल रहा है। विद्युत बोर्ड के प्रवक्ता एसके घोष ने बताया कि इस योजना के तहत 11 केवीए व 32 केवीए के तारों को बदला जा रहा है। साथ ही कई सबस्टेशन भी बनाए गए हैं। एसके मेमोरियल हॉल सबस्टेशन का निर्माण इसी के तहत हुआ है। रिस्क लेकर काम करते हैं पेसूकर्मीड्ढr पटना (का.सं.)। बरसात में पेसूकर्मियों की भी मुसीबत है। एक तो ‘मैनपॉवर’ की कमी व ऊपर से संसाधनों का भी टोटा। पेसू के कई सबडिवीजन तो प्रभारी सहायक अभियंता के सहार चल रहे हैं। कनीय अभियंताओं की भी कमी है। बिजली मिस्त्री बहुत कम हैं। दैनिक मजदूरी पर मिस्त्री रखकर किसी तरह काम चलाया जा रहा है। जितने भी कामगार हैं उस हिसाब से संसाधन मुहैया नहीं होते हैं। कामगार काफी ‘रिस्क’ लेकर गड़बड़ी दूर करने की हिम्मत करते हैं। दस्ताना नहीं, तार नहीं व औजार नहीं क्या करं। इधर-उधर से जुगत भिड़ाकर काम चल रहा है। कामगार पुराने तारों को भी सहेज कर रखते हैं। बारिश में हाईटेंशन या एलटी तार टूटकर गिर जाएं तो उन्हें पानी भर इलाकों में ढूंढ़ना भी मुश्किल है। कई मौकों पर सुबह से शाम या रात हो जाता है फॉल्ट खोजने में। इतनी दिक्कतों के बीच पेसूकर्मी काम कर लोगों को बिजली मुहैया करा रहे हैं पर उन्हें बदले में लोगों के आक्रोश का ही अधिक सामना करना पड़ता है।

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