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वैज्ञानिकों ने भेदा एचआइवी का कवच!

एड्स से दुनिया भर में लाखों लोग मार जा रहे हैं। इस बीमारी के वायरस पर हर दवा असरहीन रही है। वैज्ञानिकों की नजर में यह अनश्वर वायरस है। लेकिन, भारतीय मूल के अमेरिकी शोधकर्ता सुधीर पॉल ने एचआइ वायरस (एचआइवी) के अमरत्व-कवच में वह नाजुक हिस्सा ढूंढ़ निकालने का दावा किया है, जिस पर वार करके उसे समाप्त किया जा सकता है। डा सुधीर पॉल यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास मेडिकल स्कूल के पैथोलॉजी विभाग में शोधकर्ता टीम के मुखिया हैं। विज्ञानियों के अनुसार एचआइवी के वायरस इंसान में प्रवेश करके उसके शरीर की कोशिकाओं से जुड़ जाते हैं और लगातार इनकी वंशवृद्धि होने लगती है। कोशिकाओं से जुड़ाव वाला छुपा हुआ हिस्सा ही वायरस के आवरण का सबसे कमजोर हिस्सा होता है। आवरण के शेष हिस्से रूप बदलते रहते हैं, केवल उस कमजोर हिस्से को छोड़कर।ड्ढr डॉ सुधीर पॉल के अनुसार, वायरस के आवरण के बदलते रहनेवाले हिस्सों से दीगर वह हिस्सा अपरिवर्तनीय होना अनिवार्य है जो मनुष्य के शरीर की कोशिका से उसे जोड़ता है। अगर इस हिस्से में परिवर्तन होने लगे तो एचआइवी शरीर की कोशिका को संक्रमित नहीं कर पायेगा। एक और खास बात यह कि एचआइवी अपने इस खास हिस्से को गौण रखता है। इससे वह शरीर की सुरक्षा प्रणाली पर कोई असर नहीं डालता। नतीजन, शरीर की सुरक्षा प्रणाली वायरस के उन परिवर्तनशील हिस्सों से ही लड़ती रह जाती है, जो बहुरूपिये की तरह चकमा देकर वायरस को जीवित रखता है। शायद इतना चतुर वायरस कोई भी नहीं!ड्ढr डा पॉल की टीम ने एचआइवी के उसी छुपे हुए स्थिर हिस्से पर हमले के लिये एक खास किस्म का ऐन्टीबॉडी ‘ऐब्जाईम’ विकसित किया है। यह ऐन्टीबॉडी वायरस के विभिन्न बदलते रूप को पहचान सकता है और अन्य ऐन्टीबॉडी की तुलना में यह हाार गुणा अधिक मारक क्षमता वाला है। इसी ऐन्टीबॉडी को एचआइवी ऐन्टीबायॅटिक दवा के रूप में विकसित किया जा सकेगा। डा पॉल की टीम अगले माह मैक्िसको में होनेवाले अंतरराष्ट्रीय एड्स सम्मेलन में अपने इस अविष्कार को पेश करनेवाली है।

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