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शिक्षा सचिव ने माना आंकड़े सही नहीं

झारखंड में कार्यरत कुछ एनजीओ के अभियान फर्ाी आंकड़ों पर दौड़ रहे हैं। मामला बच्चों की शिक्षा से जुड़ा है। असर नाम की एक स्वयंसेवी संस्था ने राज्य के 22 जिलों में सव्रेक्षण अभियान चलाया। संस्था ने इस रिपोर्ट का लोकार्पण पहले दिल्ली में योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह आहलूवालिया के हाथों करवा भी लिया। गुरुवार को पुन: होटल अशोका में इसका लोकार्पण समारोह आयोजित किया गया। संस्था के प्रतिनिधि ने कहा कि पूर झारखंड में मात्र पांच फीसदी बच्चे स्कूल नहीं जाते।ड्ढr रिपोर्ट में बताया गया है कि राज्य के प्राईमरी स्कूलों में प्रतिशत शिक्षकों की उपस्थिति रहती है। संस्था ने कहा कि उन्होंने यह सव्रेक्षण वर्ष 2007 में किये। गुमला और लोहरदग्गा से आये एक एनजीओ प्रतिनिधि ने मंच पर जाकर इस पर आपत्ति जतायी। उन्होंने कहा कि ये सही आंकड़े नहीं हैं। उग्रवादग्रस्त इलाके के पिछड़े इलाकों में कई गांव ऐसे हैं जहां बच्चों ने आज तक स्कूल का मुंह नहीं देखा। सड़कें नहीं है, कुछ शिक्षक उग्रवादियों के भय से भी स्कूल नहीं जाते।ड्ढr लोकार्पण समारोह में मौजूद आद्री के स्टेट डायरक्टर पीएन सिंह ने भी स्वीकार किया कि रिपोर्ट में कमियां दिख रही है। संस्था को रिपोर्ट दुरुस्त करनी चाहिए।ड्ढr लोकार्पण समारोह में आंकड़ों को लेकर काफी देर तक हो- हंगामा हुआ। मौके की नजाकत को भांपते हुए एचआरडी सचिव जेबी तुबीद ने कहा कि आंकड़ों में अंतर है। कई पारामीटर पर ठीक से काम नहीं हुआ। सरकार के आंकड़ों के अनुसार कक्षा पांच से आठ में 6प्रतिशत बच्चे स्कूल नहीं जाते। मुझे आंकड़ों पर विश्वास नहीं। गंभीरता से काम करने की जरूरत है।

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