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‘हृदयापीठ’ भी कहते हैं ‘बाबाधाम’ को

बाबा बैद्यनाथ की पवित्र नगरी बाबाधाम यूं तो द्वादश ज्योतिर्लिगों में सर्वश्रेष्ठ कामनालिंग को लेकर देश-विदेश के कोने-कोने में प्रख्यात है, परंतु बाबाधाम देश के इक्यावन ‘शक्ित्तपीठों’ में से एक ‘हृदयापीठ’ के रूप में भी जाना जाता है। बाबाधाम एकमात्र ऐसा ज्योतिर्लिग स्थल है, जहां भगवान शिव एवं माता सती का मिलन हुआ है। देश के अन्य किसी भी ज्योतिर्लिग में यह समागम देखने को नहीं मिलता है। पौराणिक धर्म ग्रन्थों के अनुसार देवों की इस पवित्र धरा पर माता सती का हृदय उनके शरीर से भगवान विष्णु द्वारा चलाये गये सुदर्शन चक्र से उस समय खंडित होकर गिरा था, जब स्वयं भगवान शिव अपने कंधे पर माता सती के शव को लेकर तांडव नृत्य कर रहे थे तथा शिव के तांडव से पूरी पृथ्वी डोल रही थी। धार्मिक ग्रंथों में प्रसंग मिलता है कि माता सती के पिता राजा दक्ष के घर आहूत यज्ञ में जब भगवान शिव एवं माता सती वगैर आमंत्रण के पहुंचे तो वहां पर उन्हें राजा दक्ष द्वारा अपमानित किया गया। पिता के हाथों पति का अपमान माता सती बर्दाश्त नहीं कर सकीं एवं अपमानवश वह यज्ञ कुण्ड में कूद पड़ीं। माता सती के यज्ञ कुण्ड में कूदने के उपरांत भगवान शिव क्रोध से भर उठे एवं उन्होंने अपने त्रिशूल की नोक पर माता के शव को लेकर कंधे पर रख तांडव नृत्य करना शुरू कर दिया। भगवान शिव के तांडव से पूरी पृथ्वी डोलने लगी। देवलोक में भगवान शिव के क्रोध को शांत करने के लिये मंथन शुरू हो गया। निष्कर्षस्वरूप यह निकला कि जबतक माता सती का शव भगवान भोलेनाथ के कंधे पर रहेगा उनका क्रोध शांत नहीं होगा। अंतत: भगवान ब्रह्मा के कहने पर स्वयं भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से माता सती के शरीर को खण्ड-खण्ड में परिणत करने का निर्णय लिया। शास्त्रों में वर्णित है कि भगवान विष्णु के चक्र से माता का शरीर इक्यावन भागों में खंडित होकर कुल इक्यावन अलग-अलग स्थानों पर गिरा जो शक्ित्तपीठ के रूप में स्थापित हुआ। कहा जाता है किड्ढr भगवान विष्णु के चक्र से माता का ‘हृदय’ खंडित होकर बाबाधाम में गिरा था तथा स्वयं भगवान विष्णु द्वारा ही ज्योतिर्लिग के निकट उनका दाह-संस्कार भी किया गया था। इसी कारणवश इस धरा को ‘चिताभूमि’ केड्ढr नाम से भी जानाड्ढr जाता है। कांवरिया मार्गअजगैबीनाथधाम से कमराय - 6 किलोमीटरड्ढr कमराय से मासूरगंज - 2 किलोमीटरड्ढr मासूरगंज से असरगंज - 5 किलोमीटरड्ढr असरगंज से रणगांव - 5 किलोमीटरड्ढr रणगांव से तारापुर - 3 किलोमीटरड्ढr तारापुर से माधोडीह - 2 किलोमीटरड्ढr माधोडीह से रामपुर - 5 किलोमीटरड्ढr रामपुर से कुमरसार - 8 किलोमीटरड्ढr कुमरसार से विश्वकर्मा टोला - 4 किलोमीटरड्ढr विश्वकर्मा टोला से महादेव नगर - 3 किलोमीटरड्ढr माहादेव नगर से चंदन नगर - 3 किलोमीटरड्ढr चंदन नगर से जिलेबिया मोड़ - 2 किलोमीटरड्ढr ािलेबिया मोड़ से टंगेश्वरनाथ - 5 किलोमीटरड्ढr टंगेश्वरनाथ से सूईया - 3 किलोमीटरड्ढr सुईया से शिवलोक - 2 किलोमीटरड्ढr शिवलोक से अबरखिया - 6 किलोमीटरड्ढr अबरखिया से दुल्लीसार - 6.5 किलोमीटरड्ढr दुल्लीसार से कांवरिया धर्मशाला - 1.5 किलोमीटरड्ढr कांवरिया धर्मशाला से लक्ष्मण झूला - 8 किलोमीटरड्ढr लक्ष्मण झूला से इनारावरन - 2 किलोमीटरड्ढr इनारावरण से भूलभुलैया नदी - 3 किलोमीटरड्ढr भूलभुलैया नदी से गोड़ियारी - 5 किलोमीटरड्ढr गोड़ियारी से पटनियां धर्मशाला - 5 किलोमीटरड्ढr पटनियां धमशाला से कलकतिया धर्मशाला - 3 किलोमीटरड्ढr कलकतिया धर्मशाला से भूतबंगला 5 किलोमीटरड्ढr भूतबंगला से दर्शनियां - 1 किलोमीटरड्ढr दर्शनियां से शिवगंगा व बाबा मंदिर -1 किलोमीटर ं

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