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गांववालों के जी का जंजाल बनता नरगा

नरगा झारखंड में गरीब मजदूरों को रोगार तो क्या देगा, उलटा उनके जी का जंजाल बनता जा रहा है। भ्रष्टाचार के लिये बहुचर्चित पलामू-छत्तरपुर के खेंद्रा कांड में फंसे शासनतंत्र के बाबू-बिचौलिये अब ग्रामीणों को बयान बदलने के लिये रूपयों का लालच और जान की धमकियां दे रहे हैं। खेंद्रा के ग्रामीणों ने भारत सरकार के ग्रामीण विकास विभाग से सुरक्षा की गुहार लगाते हुए पत्र लिखा है कि वन विभाग के एक रांर स्थानीय बिचौलिये के साथ मिलकर उन्हें गलत मुकदमों में फंसाने की साजिश रच रहे हैं। जान मारने की धमकियां दे रहे हैं। वह लोग 14 जुलाई को गांव गए थे। पहले उन्होंने गांववालों को कहा कि अगर वे अपना बयान बदल लें तो प्रति व्यक्ति 10 हाार रूपया मिलेगा। बस, इतना कहना है कि पिछले महीने जांच टीम के सामने दिया गया उनका बयान गलत था, दबाव में दिलवाया गया था। वहां कोई भ्रष्टाचार नहीं हुआ। सभी मजदूरों को तय मजदूरी मिल गयी। भ्रष्टाचार के बाद अब धमकी! गांववालों की सुरक्षा को लेकर ज्यां द्रेज ने भी चिंता जतायी है। अर्थशास्त्री और नरगा के आर्किटेक्ट कहे जाने वाले द्रेज के नेतृत्व में इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के छात्रों ने मई महीने में पलामू के छत्तरपुर स्थित खेंद्रा गांव में सव्रेक्षण के दौरान नरगा कार्यक्रम में भारी गड़बड़ियां निकाली थीं। बाद में, सरकार की ओर से जांच दल के सामने भी खुलासा हुआ कि लगभग पूरा मस्टररोल ही फर्ाी था। दोषी पाये गये वन विभाग विभाग के दो कर्मियों को निलंबित कर उनके खिलाफ मुकदमा शुरू हुआ है। वहां नरगा का काम वन विभाग के जिम्मे था। इसी छत्तरपुर में, नरगा में हुए भ्रष्टाचार की पोल खोलने वाले ज्यां द्रेज के सहयोगी ललित मेहता की हत्या हो गयी थी।

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  • Web Title: गांववालों के जी का जंजाल बनता नरगा