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कोड़ा बोले, दिल्ली का मेला देवघर से ज्यादा जरूरी

झारखंड के मुख्यमंत्री मधु कोड़ा दिल्ली में जमे हुए हैं। हो भी क्यों न, शिबू सोरन को एनडीए ने जिस तरह मुख्यमंत्री-पद ऑफर किया, कोड़ा को कुर्सी खिसकती नजर आई। भले ही कोड़ा ने शुक्रवार को फोन पर दिल्ली से बातचीत के दौरान कहा कि वह ‘यूपीए की एकाुटता के लिए वे सीएम का पद भी छोड़ने को तैयार हैं’ वह यह कहना भी नहीं भूले कि अभी दिल्ली का मेला देखना ज्यादा जरूरी है। दरअसल, उन्हें शुक्रवार को देवघर के दुम्मा में श्रावणी मेले का उद्घाटन करना था। शनिवार को रांची आने के बार में पूछने पर उन्होंने साफ किया कि अभी तो वह दिल्ली में रहेंगे। झामुमो सुप्रीमो सोरन के स्टैंड के बार में पूछने पर उन्होंने कहा कि उनसे पूछना ही ज्यादा बेहतर होगा। सोरन अपने बार में चाहे जो तय करं, चर्चित झामुमो रिश्वत कांड के दौरान उनके सहयोगी रहे झाविद नेता सूरा मंडल का तो मानना है कि वोट देने के सवाल पर सौदा ही करना है, तो सोरन झारखंड के सीएम बनें। मंडल के मुताबिक, सोरन को यह नहीं भूलना चाहिए कि कांग्रेस ने मंत्रिमंडल विस्तार के समय उनके साथ कैसा व्यवहार किया। शिबू को मुख्यमंत्री बनाने का दांव नीतीश ने चला : विश्वास मत में यूपीए को मात देने के लिए एनडीए ने शिबू सोरेन के झारखंड के मुख्यमंत्री पद का दांव खेला है। विश्वस्त सूत्रों की मानें तो जदयू की ओर से यह पहल दिल्ली में में हुई एनडीएशासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों की बैठक में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने की। हालांकि श्री कुमार इसे स्वीकार करने की बजाय सिर्फ इतना कहते हैं कि अगर झारखण्ड में कोई विकल्प है तो उस पर विचार होना ही चाहिए। विश्वास मत में यूपीए की हार के प्रति आश्वस्त दिख रहे श्री कुमार कहते हैं कि दिल्ली के हालात अच्छे नहीं हैं। यूपीए सरकार का बचना या जाना कोई मुद्दा नही है। सवाल यही है कि चुनाव कब होंगे? वैसे केन्द्र में बैठे बिहार के ‘बयान बहादुर’ नेता जरूर चुनाव से डर रहे हैं।ड्ढr यह पूछे जाने पर कि दिल्ली में एनडीए की बैठक में शिबू सोरन को झारखण्ड का ताज सौंपे जाने पर विचार हुआ, श्री कुमार ने बैठक में हुई चर्चा का खुलासा करने से इंकार कर दिया। अलबत्ता यह जरूर कहा कि तमाम राजनीतिक हालात पर चर्चा हुई। झारखण्ड में पूरा विपक्ष टारगेट पर है। रमेश मुंडा की हत्या से स्पष्ट हो गया है कि वहां सरकार नाम की कोई चीज नहीं है। ऐसे में कोई विकल्प है तो विचार होना ही चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली में जिस तरह के हालात बने हुए हैं, उससे न तो केन्द्र की यूपीए सरकार की साख बची है और न हीं धाक। ऐसी स्थिति में यह सरकार रहे या जाए। दोनों ही हालात में जनता उन्हें निकाल-बाहर करने को तैयार है।ड्ढr

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