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व्हिप उल्लंघन पर अयोग्य ठहराए जा सकते हैं सांसद

यूपीए सरकार के पक्ष और विपक्ष में वोट देने के लिए विभिन्न राजनीतिक दल व्हिप तो जारी कर रहे हैं, लेकिन यह व्हिप उनके बागी बनने पर आमादा सदस्यों को ज्यादा नहीं डरा पाएगी। इसके उल्लंघन पर उनके विरुद्ध जब तक अयोग्य घोषित करने की कार्यवाही पूरी होगी, तब तक संसद का कार्यकाल भी समाप्त हो चुका होगा, लेकिन उनका वोट सरकार की किस्मत का फैसला कर जाएगा। व्हिप उल्लंघन के मुद्दे पर वरिष्ठ अधिवक्ता और संविधान विशेषज्ञ के.के. वेणुागोपाल ने कहा कि व्हिप का उल्लंघन करने वाले सांसद अयोग्य घोषित किए जा सकते हैं। लेकिन ऐसे सांसदों का वोट बाकायदा गिना जाएगा। दूसरी स्थ्िित यह है कि यदि कोई सांसद पार्टी का व्हिप का उल्लंघन कर सदन से जानबूझकर गैरहाजिर रहता है, तो ऐसा सदस्य भी अयोग्य घोषित हो सकता है। लेकिन यदि वह बीमार है या उसके पास ऐसा कोई ठोस कारण है, जिससे उसकी सदन से इरादतन गैरमौजूदगी सिद्ध नहीं होती, तो ऐसे सदस्य को अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता। पूर्व कानून मंत्री शांतिभूषण का इस मुद्दे पर कहना है कि ह्विप का उल्लंघन करने वाले सांसदों का कुछ नहीं बिगड़ेगा। उनका वोट गिना जाएगा और जो भी डील उन्होंने की है, उसका फायदा वे ले ही जाएंगे। उन्होंने कहा कि संविधान की 10 वीं अनुसूची के तहत संसद सदस्यों को अयोग्य घोषित करने की कार्यवाही एक लंबी प्रक्रिया है। यह प्रक्रिया भी तभी शुरू होती है जब उनकी पार्टी उनके खिलाफ स्पीकर से शिकायत कर। जसी कि चर्चा है कि समाजवादी पार्टी के कुछ सांसद ग्रुप बनाकर स्पीकर से कह सकते हैं कि वह पार्टी से अलग हैं और उन्हें अलग दल के रूप में गिना जाए। ऐसे समूह के सांसदों को स्पीकर स्वयं ही अयोग्य घोषित कर सकते हैं। लेकिन विश्वास मत प्रस्ताव में वोट इनका भी गिना जाएगा।ड्ढr संविधानविद वरिष्ठ अधिवक्ता पीपी राव ने भी इस मुद्दे पर यही राय व्यक्त की। उन्होंने कहा कि हर स्थिति में व्हिप का उल्लंघन अयोग्यता के प्रावधानों को आकर्षित करगा लेकिन ऐसे सांसदों को व्हिप के विरोध में वोट देने या न देने से रोका नहीं जा सकता।ड्ढr

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