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प्रकृति से युद्ध

अभी तक मैं जिसे बरसात समझ रहा था, दरअसल वह सरकार और प्रकृति के बीच चलने वाला युद्ध है। मेरी ये गलतफहमी अभी कुछ ही दिन पूर्व दूर हुई। प्रकृति तो भगवान समान है इसलिए उससे युद्ध का मतलब सीधे भगवान से युद्ध। खर, मुझे इससे क्या। युद्ध सरकार के साथ है। वह समझे कि इसमें बिहार पुलिस लगानी है या बिहार मिलेट्री बल।ड्ढr वैसे सरकार चाहे तो बजरिये दिल्ली की संकटग्रस्त संप्रग सरकार, इस मुद्दे पर अमेरिका से भी संपर्क कर सकती है। पूछिए क्यों। वो इसलिए कि युद्ध उसका प्रिय शौक है।ड्ढr ड्ढr आजकल वह अपने देश पर कुछ ज्यादा ही मेहरबान भी है। मुमकिन है एटामिक डील के चक्कर में भगवान से पंगा ले ही ले। भगवान का क्या बनना- बिगड़ना, हां उन्हें ये जरूर समझ में आ जाएगा कि भस्मासुर अभी जिंदा हैं। बहुत हुआ तो भगवान की तरफ से भाजपा विरोध कर सकती है। लेकिन, उसमें एक समस्या है। वो ये कि यहां तो सरकार में साझीदार है भाजपा। फिर वो सरकार के खिलाफ कैसे जा सकती है। दूसरी अंदर की बात है। भाजपा अब अपनी और किसी टांग पर प्लास्टर चढ़वाने के मूड में नहीं है।ड्ढr ड्ढr खर, बात प्रकृति के साथ युद्ध की चल रही थी। चूंकि ये बात एक सरकारी मुंह से कही गई है, इसलिए उतनी ही सच्ची है, जितने बीस रुपये किलो के बैंगन। सरकारी मुंह कभी झूठ नहीं बोलता। वह अपने अलावा सबको झूठा समझता है। इसलिए इस मुंह द्वारा कही गई युद्ध की बात को हल्के में नहीं लिया जा सकता। युद्ध चल भी रहा है। सड़कों पर नाले बह रहे हैं। मैनहोल पूर शबाब पर हैं। चारों ओर गंदगी और जलजमाव का साम्राज्य है। ये साम्राज्य अतिक्रमण करके घरों के भीतर तक घुस आया है। मगर युद्ध तो युद्ध है। वो भी प्रकृति के साथ। कोई इसमें क्या कर सकता है। सरकार भी क्या करे।

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