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6 अप्रैल, 2020|8:44|IST

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ओलंपिक को कई बार झेलना पड़ा है बहिष्कार

चीन के खराब मानवाधिकार रिकार्ड, तिब्बत में उसकी दमनात्मक कार्रवाई और दारफुर तथा ताइवान के संबंध में उसकी नीतियों के विरोध में दुनियाभर के मानवाधिकार संगठनों ने विश्व के प्रमुख नेताओं से बीिजग ओलंपिक के बहिष्कार का आह्वान किया है। बीजिंग ओलंपिक की मशाल को दुनियाभर के कई देशों में चीन विरोधी आंदोलनकारियों के कोपभाजन का शिकार बनना पड़ा था। कई अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने अमेरिका के राष्ट्रपति जार्ज डब्ल्यू बुश समेत दुनियाभर के प्रमुख नेताओं से आठ अगस्त हो होने वाले बीजिंग ओलंपिक के उद्घाटन समारोह का बहिष्कार करने की मार्मिक अपील भी की। यह पहली बार नहीं है जब ओलंपिक खेलों के बहिष्कार की मांग उठी है। खेलों के महाकुंभ को पहले भी कई बार बहिष्कार का दंश झेलना पड़ा है। इसकी शुरुआत वर्ष 1में सिडनी ओलंपिक से हुई।ड्ढr हंगरी में सोवियत संघ के दमन के विरोध में हॉलैंड, स्पेन और स्विट्जरलैंड ने ओलंपिक में भाग लेने से इन्कार कर दिया था। इसके अलावा स्वेज नहर संकट के मुद्दे पर कंबोडिया, मिस्र, इराक और लेबनान ने भी सिडनी ओलंपिक का बहिष्कार किया। 1और 1में अधिकांश अफ्रीकी देशों ने दक्षिण अफ्रीका, रोडेशिया अब जिम्बाब्वे और न्यूजीलैंड पर प्रतिबंध लगाने की मांग को लेकर ओलंपिक के बहिष्कार की धमकी दी थी। अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (आईओसी) ने इस मांग के आगे झुकते हुए दक्षिण अफ्रीका और रोडेशिया पर प्रतिबंध लगा दिया। लेकिन वर्ष 1में उसने ऐसा करने से इन्कार कर दिया था क्योंकि अफ्रीकी देश न्यूजीलैंड रग्बी टीम के दक्ष्णि अफ्रीका दौरे के विरोध में न्यूजीलैंड पर प्रतिबंध की मांग कर रहे थे जबकि रग्बी ओलंपिक खेलों में शामिल नहीं था। इसके विरोध में अधिकांश अफ्रीकी देशों ने मांट्रियल ओलंपिक (1शुरू हो जाने के बावजूद अपनी टीमों को वापस बुला लिया था। हालांकि उस समय तक कुछ अफ्रीकी एथलीट खेलों में हिस्सा ले चुके थे। लेकिन अपने देशों की सरकारों के रवैए के कारण खिलाड़ियों को खेल गांव छोड़ना पड़ा। न्यूजीलैंड पर प्रतिबंध नहीं लगाए जाने के कारण 22 देशों ने इस ओलंपिक का बहिष्कार किया। इनमें गुयाना के अलावा बाकी सभी अफ्रीकी देश शामिल थे। इसके अलावा ताइवान ने भी मांट्रियल ओलंपिक में भाग नहीं लिया था। दरअसल चीन के दबाव के कारण कनाडा सरकार ने ताइवान से कहा कि वह रिपब्लिक आफ चाइना (आरओसी) के नाम से ओलंपिक में भाग नहीं ले सकता है। हालांकि इस बात पर सहमति थी कि ताइवान आरओसी के गीत और झंडे का इस्तेमाल कर सकता है। लेकिन ताइवान नहीं माना और उसने 1तक ओलंपिक में हिस्सा नहीं लिया। हालांकि बाद में उसने नए नाम चीनी ताइपेई और विशेष झंडे के साथ ओलंपिक में वापसी की। शीत युद्ध के जमाने में सोवियत संघ और अमरीका ने एक दूसरे के यहां हुए ओलंपिक खेलों का बहिष्कार किया।

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  • Web Title: ओलंपिक को कई बार झेलना पड़ा है बहिष्कार