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बड़े दुख के साथ जज ने दी घूसखोरों को जमानत

पुलिस की ढीली पैरवी के कारण रिश्वतखोरी के दो संगीन मामलों में कानपुर विकास प्राधिकरण के मुख्य नगर नियोजक महाबीर सिंह व उन्नाव के एक आरोपित सूबेदार सिंह को अदालत को मजबूरन जमानत देनी पड़ी। पुलिस ने निर्धारित समय सीमा के भीतर अदालत में आरोप पत्र दायर नहीं किया था। इन दोनों आरोपितों की पूर्व में गुण दोष के आधार पर जमानत अर्जियाँ खारिज हो चुकी थीं।ड्ढr भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के विशेष न्यायाधीश अनिरुद्ध सिंह ने अपनी बेबसी जाहिर करते हुए जमानत आदेश में लिखा है- ‘मुझे खेद है ‘मैं इस बिन्दु पर क्षमा प्रार्थी हँू कि मुझे बाध्य होकर अभियुक्तों को जमानत पर रिहा करना पड़ रहा है।’ समय से आरोप पत्र दाखिल न होने के कारण आरोपितों की न्यायिक अभिरक्षा अवधि आगे नहीं बढ़ाई जा सकती है। विशेष न्यायाधीश ने गृह सचिव व निदेशक सतर्कता अधिष्ठान से कहा है कि वे दोषीजनों के विरुद्ध कार्रवाई करं ताकि भविष्य में ऐसी त्रुटियाँ दोहराई न जाएँ। अदालत ने कार्यवाही का ब्योरा भी माँगा है।ड्ढr अभियोजन के अनुसार कानपुर बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष सुरन्द्र बाजपेई ने सतर्कता टीम से शिकायत की थी कि कानपुर विकास प्राधिकरण के मुख्य नगर नियोजक महाबीर सिंह नक्शा पास करने के लिए 20 हजार रुपये रिश्वत माँगी है।ड्ढr रंगे हाथ पकड़ा था महाबीर को : पेा 12

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