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निर्दलीयों की बेचैनी बढ़ी

दिल्ली में सरकार बचाने- गिराने के राजनीतिक दाव- पेंच ने झारखंड में निर्दलीयों की बेचैनी बढ़ा दी है। बेचैनी के कई कारण हैं। दिल्ली में यूपीए सरकार की सेहत से जोड़कर भी झारखंड में सरकार को देखा जाता रहा है। दूजा यह कि शिबू सोरन किस प्रकार का सौदा करने में सफल होते हैं। यह सौदा निर्दलीयों की धाक पर असर डालेगा। दिल्ली के खेल से झारखंड में भी सत्ता का ताना बाना प्रभावित होने के कयास लगाये जा रहे हैं। वैसे गिनती में निर्दलीयों की संख्या अब भी अहमियत रखती है। झामुमो की ओर से एनडीए का ऑफर स्वीकार नहीं करने से भी निर्दलीयों का वजूद कायम है।ड्ढr सीएम मधु कोड़ा की टिप्पणी से उनपर यूपीए में भरोसा बढ़ा है। कोड़ा को कांग्रेस आलाकमान ने पहले ही आपरशन झामुमो में लगाया है। वह तीन दिन से दिल्ली में हैं। इधर बंधु तिर्की- भानू प्रताप शाही ने दो कदम आगे बढ़कर गुरुाी की वकालत की है। शुक्रवार को बंधु तिर्की, भानू प्रताप, स्टीफन मरांडी और जोबा मांझी की गुफ्तगू भी इसी मुतल्लिक हुई थी। बंधु- भानू ने कहा है कि गुरुाी सीएम बनें, उन्हें एतराज नहीं। शनिवार को वे दिल्ली पहुंचे। राजनीतिक गलियार में चर्चा है कि हाव- भाव भांपने ही मंत्री दिल्ली गये हैं।ड्ढr विभागीय काम से दिल्ली गये कमलेश सिंह ने कहा है कि वह 22 के बाद ही लौटेंगे। मंत्री समीकरणों पर नजर रखे हुए हैं। उनका कहना है कि गुरुाी केंद्र में मंत्री बनेंगे। इधर स्टीफन मरांडी भी पल-पल दिल्ली की खबर टटोलने में लगे हैं। मरांडी का कहना है कि वह यूपीए के साथ हैं। यूपीए जिस हाल में रखे। गुरुाी का नाम सीएम के लिए उछल रहा है, क्या रुख होगा एनोस एक्का से पूछे जाने पर कहा कि थोड़ी देर में बताते हैं। फिर यही दुहराया। हकीकत में एक्का भी समीकरणों को भांपने में लगे हैं।

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