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विश्वास मत पर अमेरिका की पैनी नजर

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की सरकार द्वारा पेश किए जाने वाले विश्वास मत पर मंगलवार को होने वाले मतदान पर अमेरिका बहुत सावधानीपूर्वक निगाह रखे हुए है। ह्वाइट हाउस और विदेश विभाग किसी संप्रभु राष्ट्र के आंतरिक मामलों में दखल देने के आरोपों से बचने के लिए विश्वास मत पर किसी प्रकार की टिप्पणी करने से बच रहे हैं, लेकिन अधिकारियों को पूरी आशा है कि मनमोहन सिंह की सरकार बच जाएगी। मनमोहन सिंह की सरकार के बने रहने पर ही अमेरिकी राष्ट्रपति जार्ज बुश को अपने शासन काल के अंतिम दिनों में विदेश नीति के मामले में महत्वपूर्ण सफलता हासिल करने की आशा बनी रह सकती है। अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव के कारण नई दिी के राजनीतिक घटनाक्रम में अमेरिकी मीडिया ने भी अधिक ध्यान नहीं दिया था, लेकिन अब वहां के समाचार माध्यमों में भी मनमोहन सरकार के विश्वासमत की ओर ध्यान गया है। टाइम्स पत्रिका ने लिखा है कि अमेरिका के साथ असैनिक परमाणु समझौते के प्रति मनमोहन सिंह की प्रतिबद्धता ने उनके राजनीतिक भविष्य को दांव पर लगा दिया है। अब 22 जुलाई को ही निर्णय होगा कि उनका जुआ सफल होता है या फिर उनके चार साल के शासन का अंत हो जाएगा।

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