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माया की ‘माया’ से भाजपा में खलबली

विश्वास मत के लिए जोड़तोड़ के बीच तीसरे मोर्चे की नई नेता के रूप में बहुजन समाज पार्टी की नेता मायावती के उभरने और उनके प्रधानमंत्री के दावेदार के रूप में मजबूती से आगे आने के बाद भारतीय जनता पार्टी में खलबली मचा दी है। भारपा किसी भी रूप में मायावती को स्वीकार नहीं कर सकती। भारतीय जनता पार्टी ने जिस तरह से लाल कृष्ण आडवाणी को प्रधानमंत्री के रूप में पेश किया था, उसके बाद वह मायावती को प्रधानमंत्री के रूप में नहीं देखना चाहेगा। भारतीय जनता पार्टी सिर्फ सरकार गिराने के बाद चुनाव में जाना पसंद करेगी।द्वद्द भाजपा की एक अन्य परेशानी यह है कि उन्हीं की पार्टी के प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने अमेरिका के साथ परमाणु करार की नींव रखी थी। ऐसे में अगर इस मुद्दे पर सरकार गिर जाती है तो उसे लगता है कि वह जनता के पास अपनी बात मजबूती से नहीं रख पाएंगे। विश्व हिन्दू परिषद के नेता प्रवीण तोगड़िया ने इस बीच कहा है कि परमाणु करार होना चाहिए। उनके इस बयान का विश्वास मत के दिन क्या प्रभाव पड़ेगा यह तो वक्त बताएगा, लेकिन यह तो साफ है कि भाजपा भी इस मुद्दे पर पशोपेश में ही है।

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