अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

कहां जाएं दिल्लीवासी

सड़कों पर जाएं तो ब्लू लाइन और बाइकर्स मार रहे हैं और घरों में रहें तो गुंडे घरों में घुस कर मार रहे हैं। दिल्लीवासी हैरान-परशान हैं कि आखिर जाएं तो जाएं कहां?ड्ढr इन्द्र सिंह धिगान, दिल्लीड्ढr जनसंख्या पर लगामड्ढr जिस प्रकार जनसंख्या लगातार बढ़ती जा रही है, उसी अनुपात में उत्पादन मांग भी बढ़ती जा रही है क्योंकि हमार पास खाद्यान्नों की एक सीमा है और जनसंख्या बढ़ने से लगातार संकट उत्पन्न होता जा रहा है। एक ओर तो हम ‘जनसंख्या दिवस’ मनाते हैं, वहीं दूसरी ओर जनसंख्या से होने वाली परशानियों को भूल जाते हैं। मगर देखा जाए तो 15 से 25 वर्ष की आयु वालों की जनसंख्या अधिक है। यह अधिकतर तबका बेरोगार है। ऐसे में जनसंख्या पर लगाम के लिए कड़ी योजनाओं को अमली जामा पहनाना निहायत जरूरी है, अन्यथा परिणाम हमें ही भुगतने पड़ेंगे।ड्ढr शारिक हैदर नकवी, दिल्लीड्ढr भला नहीं होगाड्ढr आधुनिक दुनिया में छात्र राजनीति का महत्वपूर्ण स्थान है। यूरोप में फ्रांस के विश्व प्रसिद्ध छात्र आंदोलन से लेकर भारत के पड़ोसी देश म्यांमार में चलनेवाले छात्र आंदोलन तक छात्र राजनीति का असर देखा जा सकता है। छात्रों ने बड़े नेताओं की अगुवाई में तो राजनैतिक आंदोलन में भागीदारी की ही है, कई बार खुद छात्रों के अपने आंदोलनों की अलग से निर्णायक राजनैतिक भूमिका भी रही है। दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्र राजनीति से विचारों और प्रतिबद्धता की पूरी तरह से विदाई हो चुकी है। चुनावों में धन-बल का खुला प्रदर्शन होता है। पूर शहर में दिन-रात दौड़ने वाली गाड़ियों, शराब और कबाब की दावतों और हर दिन सुबह शहर की दीवारों पर दिखनेवाले महंगे से महंगे पोस्टरों से अंदाजा लगाया जा सकता है कि दोनों संगठन किस कदर पैसा पानी की तरह बहाते हैं। ये तो तय है कि छात्रों का इससे कोई भला नहीं होने वाला।ड्ढr नीरा कुमार, दिल्ली विश्वविद्यालयड्ढr राजनीतिड्ढr यह कैसी राजनीति हैड्ढr कौन-सा है बाजारड्ढr जिसमें नेता बिक जातेड्ढr और बन जाती सरकारड्ढr निर्दलियों की चांदी कटतीड्ढr और, बाकी भी हैं तैयारड्ढr पैसा फेंक तमाश देखोड्ढr हमीं बचा लेंगे सरकारड्ढr शशिप्रभा शर्मा, हापुड़, उ.प्र.ड्ढr कुछ तो कम कर सकते हैं हादसेड्ढr उत्तराखंड राज्य के अधिकांश हिस्सों में आजकल अत्यधिक मूसलाधार वर्षा होने के कारण सड़क पर मलबा गिरने से यात्री घंटों जाम में फंसे रहते हैं और कई दुर्घटना के शिकार हो जाते हैं। इसके कारण चार-धाम यात्रा पर भी असर पड़ता है। मलबे को हटाने की उचित व्यवस्था करनी चाहिए। नशा करके वाहन चलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए, इसके साथ ही रिश्वत लेने वाले ट्रैफिक पुलिसकर्मियों के खिलाफ भी कठोर कार्रवाई करने की आवश्यकता है। उत्तराखंड में प्राय सड़क दुर्घटनाएं होती हैं, यह अत्यंत चिंता का विषय है। आशा है सरकार समुचित कदम उठाएगी।ड्ढr अभिषेक राणा, नवादा

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title: कहां जाएं दिल्लीवासी