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बसपाइयों की तो बल्ले-बल्ले

दिल्ली की गद्दी के लिए हो रही उठापटक में उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री एवं बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती संप्रग सरकार के खिलाफ जिस तरह धुरी बन कर उभरी हैं उससे प्रदेश के बसपाई खासे उत्साहित हैं। खासतौर से वाम मोर्चे और यूएनपीए घटक दलों की बसपा प्रमुख को अगला प्रधानमंत्री बनाने की घोषणा से पार्टी कैडर को चमत्कारिक नतीजे की पूरी उम्मीद है।ड्ढr यूपी में बहुमत की सरकार बनाते ही बसपा ने दिल्ली की गद्दी का अपना अगला लक्ष्य बता दिया था और पार्टी ‘यूपी तो हुई हमारी है अब दिल्ली की बारी है’ के नार के साथ लक्ष्य को पूरा करने की तैयारी में जुट गई थी। खुद बसपा प्रमुख ने साल भर से कम समय में देश के लगभग सभी प्रान्तों का दौरा कर वहाँ पार्टी की इकाइयाँ गठित की। संगठन को मजबूत किया। लेकिन पार्टी की यह सारी तैयारियाँ अगले लोकसभा चुनाव को लेकर थीं। शायद पार्टी ने भी यह नहीं सोचा था कि लोकसभा चुनाव से पहले ही राष्ट्रीय परिदृश्य में ऐसा मौका आ जाएगा जिसमें मनमोहन सिंह सरकार को गिराने की पूरी मुहिम बसपा प्रमुख को आगे करके लड़ी जाएगी। धुर विरोधी समाजवादी पार्टी के पुराने दोस्त वामपंथी दल यूँ आगे आकर ‘बहिन जी’ को प्रधानमंत्री बनाने का एलान करंगे। यहाँ तक कि सपा की अगुआई में गठित यूएनपीए भी बसपा प्रमुख को नेता मान रहा है।ड्ढr बसपाई दिल्ली में बसपा प्रमुख के पक्ष में बने माहौल को लेकर बेहद खुश हैं। उनकी नजर में यह एक बड़ी उपलब्धि है और इसकी एक वजह पार्टी के जनाधार में लगातार हो रही बढ़ोतरी है। हालाँकि खुद बसपा प्रमुख मायावती और राय सलाहकार परिषद के अध्यक्ष सतीश चन्द्र मिश्र पिछले कई दिनों से दिल्ली में हैं, लेकिन पार्टी के लखनऊ में जमे मंत्रियों से लेकर कार्यकर्ताओं की निगाहें दिल्ली में क्षण-क्षण पर बदल रही सियासी गतिविधियों पर हैं। राय सरकार के कई कद्दावर मंत्री बगैर दिल्ली जाए लखनऊ से ही पार्टी की ‘संप्रग सरकार गिराओ’ मुहिम को अंजाम दे रहे हैं जबकि कार्यकर्ता बेसब्री से 22 जुलाई का इंतजार कर रहे हैं। ड्ढr

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