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कौम के गम में डिनर हुक्काम के साथ

हते हैं, दिल तक पहुंचने का रास्ता पेट से होकर गुजरता है लेकिन राजनीति में इसका इस्तेमाल वोट के लिए किया जाता है। इसलिएरविवार राजनीतिक दलों के लिए डिनर डिप्लोमेसी के नाम रहा। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने यूपीए और अन्य समर्थक सांसदों को भोज कराया। गुरुजी, भाजपा के बागी बृजभूषण और नेशनल कांफ्रेंस के सांसदों की मौजूदगी उन्हें जरूर राहत दे रही होगी। इस डिनर में मनमोहन के साथ टेबल पर सोनिया गांधी, डॉ. कर्ण सिंह, मुलायम, लालू यादव, अमर सिंह, प्रियरंजन दासमुंशी और शरद पवार थे। रामविलास पासवान भोज में अपनी पार्टी के सांसद सूराभान सिंह के साथ पहुंचे।ड्ढr ड्ढr सूराभान को आपराधिक मामले में हाल में बिहार की कोर्ट ने सजा सुनाई तो पासवान ने उन्हें महान समाजसेवी बताया था। सो, सूराभान समाजसेवा के लिए हाजिर हैं। मनमोहन डिनर डिप्लोमेसी कर रहे हों तो भाजपा के पीएम इन वेटिंग लालकृष्ण आडवाणी कैसे पीछे रहते। उनके डिनर में ही साफ हुआ कि सिख प्रधानमंत्री के पक्ष में अकाली दल सांसदों की अनुपस्थिति की अटकलें आधारहीन हैं। अकाली दल के एक सांसद को छोड़कर बाकी सभी 7 भोज में शामिल हुए। जदयू के भी दो सांसदों को छोड़ बाकी छह मौजूद थे। शिवेसना के ज्यादातर सांसद डिनर में मौजूद थे। यहां भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह के यूपीए के साथ जाने का मुद्दा उठा लेकिन कांग्रेसी सांसद कुलदीप विश्वनोई के आने से यह कमी पूरी हो गई।ड्ढr ड्ढr यूएनपीए के घटक टीडीपी ने भी तीसरी ताकतों को लंच पर बुलाकर सरकार गिराने और भावी राजनीतिक परिदृश्य में नफा-नुकसान तलाशने की कोशिश की। लंच की स्टार रहीं बसपा सुप्रीमो मायावती जिन्होंने कहा कि एकसूत्री एजेंडा सरकार गिराने का है। इस लंच में लेफ्ट, एजीपी तथा जेडीएस की तरफ से देवगौड़ा के पुत्र एचडी कुमारस्वामी शामिल हुए।

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