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फिर आंदोलन की तैयारी

सरकार द्वारा स्थानीय नीति बनाने की कवायद शुरू होते ही आदिवासी मूलवासी जनाधिकार मंच पुन: सक्रिय हो उठा है। संगठन को पुनर्जीवित करने के लिए 20 जुलाई को छोटानागपुर लॉ कॉलेज में हुई बैठक में विचार विमर्श हुआ। इसमें विभिन्न जिलों से शामिल प्रतिनिधियों ने एक स्वर से स्थानीय नीति के कट् ऑफ डेट 2000 करने के विचार का विरोध किया।ड्ढr बैठक की अध्यक्षता कर रहे डॉ आरपी साहू ने कहा कि इससे लाखों स्थानीय लोग अपने अधिकारों से वंचित हो जायेंगे। उन्होंने कहा कि वह बाहरी-भीतरी की बात नहीं करते। उनका एकमात्र उद्देश्य है स्थानीय लोगों को उनका हक दिलाना। भ्रष्टाचार और स्थानीय लोगों की समस्याओं के लिए इस संगठन का गठन हुआ था, अब पुन: इसके माध्यम से आवाज उठाने का समय आ गया है।ड्ढr पूर्व विधायक देव कुमार धान और रतन तिर्की ने कहा कि संगठन को स्वार्थी लोगों से बचाना होगा। कई लोग इस मंच के माध्यम से अपनी राजनीति चमका कर निकल गये। एसे लोगों की पहचान कर उनसे अलग रहना है। उन्होंने कहा कि संगठन को मजबूत करने के लिए स्वच्छ छवि को लोगों को इससे जोड़ना है। डॉ साहू ने कहा कि आपस में ही चंदा कर मंच को आर्थिक रूप से मजबूत बनाया जायेगा।ड्ढr बैठक में निर्णय लिया गया है कि 27 जुलाई को मंच की आम सभा बुलायी जायेगी। इसमें किसी भी राजनीतिक दल या राजनेता को शामिल नहीं किया जायेगा। इसके बाद संगोष्ठी कर लोगों की राय ली जायेगी। इसके आधार पर स्थानीय नीति का प्रारूप तैयार कर राज्य और केंद्र सरकार को भेजा जायेगा। इसके बाद 15 दिनों में उनके सुझाव पर अमल नहीं हुआ, तो आंदोलन की रणनीति बनायी जायेगी, ताकि संवैधानिक रूप से स्थानीय लोगों को उनके अधिकार मिल सकें।ड्ढr बैठक में डॉ करमा उरांव, लाल काशी नाथ शाहदेव, इशरत आलम, डॉ सुदेश, प्रो जुलियस आइंद, सुमन एक्का, स्वप्न कुमार, सुरंद्र भगत, बीएन सिंह आदि मुख्य रूप से शामिल थे।

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