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..और चल पड़े बाबा के दरबार

पहली सोमवारी पर भोले बाबा के जलाभिषेक के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु स्वर्णरखा नदी की ओर रवाना हुए। शाम ढलते ही चौक-चौराहों पर गेरुआ वस्त्र पहने और कांधे पर कांवर उठाये भक्त जल भरने के लिए स्वर्णरखा नदी की ओर जाते नजर आये। शहर के प्रमुख चौक-चौराहों पर श्रद्धालुओं के लिए खास इंतजाम किये गये । शहर बाबा भोले के भक्ित गीतों से देर रात तक गुंजायमान था। रात 11 बजे मेन रोड में कावंरियों का जत्था एकत्रित हुआ। यहां से भक्त दो भागों में बंट गये। कुछ ने अंगराबाड़ी का रूख किया, तो बड़ी संख्या में भोले भंडारी के भक्त स्वर्णरखा नदी की ओर प्रस्थान कर गये। रात ढलते ही पुन: कावंरियों का तांता बोल बम, ताड़क बम, पहाड़ी बाबा दूर है जाना जरूर है, हरहर महादेव .. का उदघोष करते हुए पहाड़ी मंदिर पहुंचा। तड़के बाबा का जलाभिषेक कर भक्तों ने पूजा-अर्चना की।ड्ढr

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